Friday, May 29, 2009

अगले दिन सुबह जब राम सो कर उठी तो उस के पैर जमीन पर नहीं पड़ रहे थे । जग्गू से कास के चुदने के बाद उसे अपना शरीर हल्का लग रहा था और उस को अब पूरा विस्वास था के अब जग्गू को अपने वश मैं कर ही लेगी। उस ने अपने पेटी कोट बाँधा और ब्रा के बिना ही ब्लाऊज पहना और किचन मैं आ गयीउस ने दो कप चाय के लिए पानी गैस पर चढ़ाया और अपने बाल बाँधने लगी। तभी दो मजबूत बाँहों ने उसको पीछे से कस लिया और उस के पपीते जैसे मोम्मे मसलले जाने लगे। रमा को अब मालूम था के यह बाहें जग्गू की थी और उस ने इस नए आक्रमण का आनंद लेना शुरू कर दिया। वोह मुद कर जग्गू की गर्दन पर चुम्बन लगा रही थी। रमा के सहयोग से जग्गू मस्त हो गया और रमा का पेटी कोट खोल कर किचन के फर्श पर गिरा दिया रमा के नंगे चूतड फ़िर से जग्गू के सामने थे। उस ने रमा को पलता और घुटनों के बल बैठ कर उस की जांघों के बीच उस की चूत से जीभ सता दी। उस को रमा की छूट की सुगंध के साथ साथ रात की चुदाई के समय छोड़ा अपना ही वीर्य की मिश्रित गंध मिल रही थी। सब सोच सोच कर उस का लंड फ़िर से सांप की तरह फुफक्कारने लगा। रमा ने अपने प्रेमी की यह हालत देखी तो उस से रहा नहीं गया और वह भी किचन के फर्श पर बैठ कर जग्गू के लंड से खेलने लगी । फ़िर झुक कर उस ने लंड का सुपादा अपने मुंह मैं घुसा लिया और उस को लोलीपोप की तरह चूसने लगी । रमा को लंड चूसने मैं विशेष महारत हासिल थी जिस से जग्गू के मुंह से सी सी सी की आवाजें निकलने लगी।

"ओह जान क्या मस्त लैंड चूसती हो तुम" "कितनो को ऐसे चूसा तू ने ? आह आह आह आह .............

"आह राजा लंड भी तो मस्त है तेरा" तेरे जैसे मस्त लंड मिलते ही कितने हैं ? राज्जा उम्म्म उम्म्म्म उम्म्मम्म ...... कितनी औरतों को यह नसीब हुआ है अब तक ?

"ओह रमा आह आह आह्ह ......तू तीसरी है मेरी जान .....आह आह .... (जग्गू अपनी साली को भी चौद चुका था ) मगर ऐसी मस्त कोई नहीं " जग्गू मस्त होता जा रहा था।

"कोई बात नहीं प्यारे अब ऐश ही ऐश " उम्म्म उम्म्म पुच पुच आह " रमा बोली

जग्गू ने रमा को उठा कर गोदी मैं बैठा लिया और उन दोनों की जीभें एक दूसरे के मुंह को तलाशने लगी ।

उम्म्म्म .....आःह ..........उम्म्म आःह्ह

जग्गू ने रमा की टाँगे फैलाई और अपना लंड उस की रस भरी चूत मैं सरका दिया

"सी सी सी " रमा के मुंह से सीत्कार निकली

जगू ने उस के मोम्मे चूसना शुरू कर दिया।

रमा उछल उछल कर लंड को चूत मैं अन्दर बहार कर रही थी ।

दोनों मैं से किसी को ध्यान नहीं था के वो किचन के फर्श पर हैं और गैस पर चाय के लिए पानी उबल रहा है । चुदाई चीज़ ही ऐसी है ।

फच फच फच ....रमा की रस से भरी चूत मधुर संगीत देने लगी। और रस बह बह कर उस की चूत से गिर कर जग्गू की जाघें गीली कर रहा था। रमा के पपीते जैसे मोम्मे उछल रहे थे । जग्गू उन का पूरा मजा ले रहा था। कभी वह उन को चूसता कभी उन की घुंडी मरोड़ देता और कभी पूरी मोम्मे को मसल कर उन का आनद लेता। मोम्मे ले मोम्मे के मामले मैं जग्गू बहुत भाग्य शाली रहा था । उस की बीवी के मोम्मे भी बड़े बड़े थे और ढूढ़ जैसे सफ़ेद रंगे के थे । उस की साली पिंकी के मोम्मे तो कपड़े फाड़ कर बाहर आते हुए दिखायी देते थे और अब रमा के ४०डी साइज़ की ब्रा मैं फिट होने वाले मोम्मे पा कर वह फ़िर से एक बार धन्य हो रहा था ।

"ओह मेरी कुतिया मैं तुझे कुत्ते की तरह चोदना चाहता हूँ ....."

"आज जा मेरे यार तेरे लिए यह कुतिया है तैयार " कब के रमा घूम गयी और घुटने के बल हो गयी । रमा की गांड अब जग्गोऊ के सामने थी । उस का मन हुआ के वह अपना बहुजन रमा की गांड के गुलाबी छेद मैं घुसा दे । मगर अभी तो उसे राम की लस ल्सती चूत मैं अपना माल छोड़ कर बरसों की प्यास बुझानी थी । इस लिए उस ने झट से अपना लिंग रमा की चूत मैं वापिस डाला और उस के चूतड कास के पकड़ लिए और धक्के देना शुरू कर दिया।

"आह रानी ...................आह रानी ......."" जग्गू बोला

" ओह फाड़ दे चूत मेरी " रमा ने जवाब दिया । "और पेल मेरे राजा "

"यह ले मेरी रंडी " फच से जग्गूके लंड की टिप रमा की बचेदानी से जा टकराया और उस के अंड रमा के चूतड पर आ सटे। रमा को लगा आज ही वह गर्भ वती हो जायेगी । उसके मुंह से मीठी सी आह निकली । अपना चौथा बच्चा जग्गू के वीर्य से ही पैदा करेगी ऐसा सोच लिया उस ने ।

रमा चाहती थी यह चुदाई ज़िंदगी भर चलती रहे और जग्गू का मोटा लंड उस की चूत मैं फच फच करता रहे। मगर तभी वह झड़ने लगी और उस के शरीर मैं भूचाल aur chut main badh aa gayee । राम के पूरी तरह झड़ने के बाद भी जगू ने दो तीन मिनट तक उस को थोका और फ़िर उस की चूत को अपने माल से भर दिया।

चाय के बर्तन मैं पानी ख़तम हो चुका था मगर रमा की हिम्मत नहीं थी के वह चाय को देखे । उस ने अपनी आँखें बंद की और किचन के फर्श पर ही घुटनों के बल लुढ़क गयी।

जग्गू उठा और अपना मालऔर छूट के रस से सना हुआ लंड हुआ गैस तक गया । गैस बंद करके उसी दशा मैं आ के डबलबेद पर आ गिरा । अब उसे चूतों के लिए भटकना या तडपना नहीं पड़ेगा।




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