एक लंबी कहानी है जो पाठको के मजे के लिए लिखी गयी है
कहानी के पात्र नीचे लिखे हुए हैं
और बिना समय गवाये कहानी पर आता हूँ
मम्मी के शादी बहुत कम उम्र मैं ही हो गयी थी उन की जवानी की कहानियां बताती हैं की कितनी बड़ी चुदक्कड रही हैं, 14 -15 साल की होते होते चूत मैं उंगली, पेंसिल, केला और नल के पानी की धार से से मजे लेने लगी थी। जब इस से काम नहीं चला तो अपने मामा के बेटे संजय से सील तुड़वा कर पूरी चुदाई करने लगी, उस के शरीर की गर्मी इतनी थी के बेचारा संजय अपना पूरा दम लगा कर भी उस की गर्मी ठंडी नहीं कर पाता था इस बात का फायदा संजय के भाई पंकज ने उठाया और वह भी अपनी प्यारी बहन को चोदने लगा बहुत जल्द ही मम्मी के दिन चढ़ गए और दोनों भाइयों को यह पता ही नहीं था की किस का बच्चा मम्मी के पेट है। इस लिए मम्मी ने दोनों से अंदरूनी सफाई के पैसे ऐंठ लिए और जब इस बात का खुलासा हुआ तो दोनों भाइयों को धता बता दिया और घर के ड्राइवर राजू को पटा लिया
राजू तगडा चोदू था वह मम्मी ही नहीं मेरी नानी को भी चोद रहा था और मेरी मौसी जो 10 -11 साल की थी पर नज़र लगाए हुए था वह सुबह नाना जी को दूकान पर छोङ आता और उस के बाद शाम तक नानी और मम्मी के साथ रंग रैलियां मनाता था
मम्मी जब 18 साल की थी तब एक दिन नाना जी ने उन्हें राजू के ऊपर चढ़ कर चुदाई करते हुए देख लिया दोनों चुदाई मैं इतने मस्त थे की नाना जी को नहीं देख पाए। फिर नाना जी जल्द बाजी मैं रिश्ता ढूंढ कर मम्मी की शादी कर दी और मम्मी ससुराल आ गयी। जल्दबाजी मैं नानाजी ने लड़के और उस के घर के बारे मैं कुछ भी पता नहीं किया और हाँ होते ही शादी कर डाली। राजू ने बहुत कोशिश की शादी टूट जाए और मेरे पिता जी और दादा जी को गुमनाम चिठ्ठी भी लिखी, मगर उन दोनों ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। मेरी दादी मर चुकी थी और दादा जी को घर मैं एक औरत की सख्त जरूरत थी, अपने गांडू बेटे की शादी के नाम पर उन को एक चूड़ी हुयी लड़की मिल रही थी, उन के तो दोनों हाथों मैं लड्डू होने वाली थे. इस लिए उन्होंने ऐसी वैसी किसी बात पर ध्यान न देते हुए मेरी मम्मी की शादी अपने गाँडू बेटे से करवाई और अपने घर ले गए
मम्मी का ससुराल यानी मेरा घर भी अजीब था। मेरे पिता जी गांडू थे उन्हें चूत चोदने मैं बिलकुल रुची नहीं थी वह तो बस अपने दोस्तों से गांड मरवाते थे यह बात घर मैं सभी को पता थी फिर भी दादा जी ने उन की शादी सिर्फ इस लिए करवाई की उन्हें चोदने के लिए एक जवान चूत की जरूरत थी मेरी दादी एक साल पहले मर चुकी थी और घर मैं दादा जी, मेरे पापा मेरी 8 साल की बुआ ही रहते थे
शादी की पहली रात से ही मम्मी को दादा जी ने ही चोदा। मेरी मम्मी दादा जी कमरे मैं ही सोती थी, और मेरे पिताजी और अपने दोस्त के साथ एक कमरे मैं सोते थे. फिर मैं पैदा हुआ। मेरी देख भाल का ज़िम्मा बुआ ने अपने ऊपर ले लिया। वह सारे वक़्त मुझे अपने पास ही रखती थी। जब बुआ जवान हुयी तो मेरे पिता और दादा ने उनकी शादी अपने एक दोस्त से करवा दी इस तरह मेरे पिता जी का गाँडू दोस्त था मेरे फूफा जी बन गए। धीरे धीरे मैं बड़ा होने लगा। बुआ हमेशा मेरे साथ रहती थी और मेरा बहुत ख्याल रखती थी। वैसे मम्मी मुझे बहुत प्यार करती थी पर उन्हें दादा जी और उन के तीन मित्रों से चुदाई से समय ही नहीं मिलता था । मैं उन्हें कई बार आधी नंगी अवस्था मैं पराये मर्दों से लिपटते देखा था
जब मैं नवमी क्लास मैं था एक रात मैं ने अपने पजामे के नाड़े के पास बुआ की उंगलिओं को महसूस किया मुझे लगा बुआ उस को खोलना चाहती हैं मैं शांत पड़ा रहा मेरा दिल बहुत जोर से धड़क रहा था और मुझे यह सब बहुत अच्छा लगा रहा था बुआ ने धीरे से पाजामा खोल और मेरा कच्छा नीचे कर के मेरे लण्ड को सहलाने लगी उफ़ क्या मस्ती थी बुआ की नरम नरम उगलियाँ मेरे लण्ड को पकड़ कर ऊपर नीचे कर रही थी और सुपारे को दबा रही थी थोड़ी देर ऐसे ही मस्त मस्त रगड़ाई के बाद बुआ ने मेरे लण्ड को अपनी जाँघों के बीच ले गयी। इस से मेरे मजा और बढ़ गया और मेरा दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था उन की जाँघों की नरम नरम मखमल सी खाल पर रगड़ खाने से लण्ड की मस्ती और ज्यादा बढ़ गयी और थोड़ी देर में लण्ड से पानी जैसा चिपचिपा कुछ निकला और वह ढीला हो गया फिर बुआ ने भी अपनी जांघें पोंछ कर साफ़ की और सो गयीं
दिन मैं हम ने इस बारे मैं कोई बात नहीं की। मुझे रात का इंतज़ार था, यह सब बात ऐसी थी की मैं इस बारे मैं अपने किसी दोस्त से भी बात नहीं कर सकता था अगली रात फिर उसी तरह बुआ ने मेरा पाजामा खोला और लण्ड निकाल कर उस को मलने लगीं। फिर पलट कर अपने चूतड़ मेरी तरफ को कर दिए और अब मेरा लंड उन के नरम नरम चूतड़ों पर रगड़ रहा था। उफ्फ्फ कितना ज्यादा मजा आ रहा था बुआ के साथ इस खेल मैं , मस्ती मस्ती मैं मैं ने बुआ को कमर से पकड़ लिया और अपना लण्ड उन के नरम नरम चूतड़ों पर घिसता रहा फिर थोड़ी देर बाद वही हुआ मेरे लण्ड से पानी निकला और बुआ के चूतड़ों पर फेल गया बुआ ने उस को साफ़ किया और सो गयीं
अगले दिन मैं सारे दिन सोचता रहा बुआ क्या कर रही हैं ? क्या यह मर्द औरत वाली चुदाई है ? मेरे लण्ड से जो पानी निकलता है क्या उस से बुआ को बच्चा हो जाएगा ? वगैरह वगैरह। .. मगर मुझे बताने वाला कोई नहीं था इस लिए सारा दिन बैचेनी से गुजरा
अगली रात बात और आगे बढ़ गयी बुआ ने मेरा पाजामा खोला और मेरे लण्ड को उसी तरह मल मल कर खड़ा किया उस ने बाद बुआ मेरे ऊपर आ गयीं और मेरे लण्ड को पकड़ कर अपनी जाँघों के बीच लिया मुझे लगा वह उन के छेद मैं घुस गया। छेद के अंदर खूब गरम गरम लग रहा था और खूब टाइट फंस हुआ था उस वक़्त मैं ने सोचा वह उन की गांड वाले छेद मैं चला गया है इस मैं मुझे पहले दो दिन से भी ज्यादा मजा आ रहा था और ऐसा लग रहा था बुआ को भी मजा आ रहा था काफी देर बुआ मेरे लण्ड को अपने छेद मैं ले कर ऊपर नीचे होती रही और फिर मेरा पानी निकल गया इस बार सारा का सारा पानी बुआ के छेद मैं समां गया था
अगले दिन मैं ने अपनी क्लास के कुछ लड़कों से जिन को गन्दी बातों के बारे मैं ज्यादा पता था बात करने की कोशिश की, उस से मुझे यह तो पता चल गया की जो मेरे और बुआ के बीच हो रहा था वह चुदाई या सेक्स ही थी और यह भी पता चला की चुदाई गाड़ से नहीं चूत मैं होती है मैं ने तब तक किसी भी बड़ी औरत की चूत देखी तो थी नहीं और मैं चूत का मतलब छोटी बच्ची जैसी सोचता था इस लिए मुझे आश्चर्य भी हुआ की इतना मोटा लण्ड छोटे से छेद मैं कैसे जा सकता है
फिर यह रोज़ रात हमारे बीच यह खेल होने लगा। बुआ मुझे नंगा करती और मेरे ऊपर आ कर मस्त चुदाई करती फिर हम दोनों झड़ जाते और सो जाते दिन मैं हमारे बीच इस बात पर कोई बात नहीं होती थी मगर मुझे बुआ बहुत प्यारी लगनी लगी और मैं दिन भर उन के बारे मैं ही सोचता और रात होने का इंतज़ार करता
करीब 10 दिन बाद की एक रात बुआ के बदन मैं कोई हरकत नहीं थी और मेरा लण्ड उन की चूत मैं घुसने के लिए बेक़रार था और बुआ कुछ कर ही नहीं रहीं थी आखिर मैं ने ही बुआ को अपनी तरफ खींचा और उन की सारी और पेटीकोट उठाने लगा पर उन्होंने मेरा हाथ हटा दिया मैं ने जब फिर से खींचा तब उन्होंने मेरे कान के पास आ कर बोला “कपडे पर हूँ “
मुझे पता ही नहीं था यह क्या होता है पर मैं जान गया उन को कोई दिक्कत तो जरूर है इस लिए और कुछ नहीं किया और सो गया अगले दिन मैं ने अपने उन्ही दोस्तों से पूछा की यह "कपडे पर होना क्या होता है ?
वह सब हंस पड़े फिर मुझे बताया की हर जवान औरत की चूत मैं से हर महीने तीन चार दिन खून आता है जिस की वजह से वह चूत पर कपडा लगा कर रखती हैं। इन दिनों औरत का गन्दा माना जाता है। मैं तो आश्चर्य मैं आ गया मुझे तो यह सब पता ही नहीं था तो क्या बुआ की चूत मैं से भी खून आ रहा है ?
अगले दिन मैं बुआ पर ज्यादा नज़र रखने लगा क्या सचमुच उन के साथ वही हो रहा है जो लड़के कह रहे थे ! एक बात जो मैं ने देखी वह यह थी की उन्होंने शाम को पूजा नहीं की फिर मैं ने देखा की नहाने जाते समय कुछ पुराने कपडे अपने साथ ले गयीं थी और बाथरूम की खिड़की के पीछे कुछ ऐसे ही कपडे लिपटे हुए रखे थे। मैं ने उन मैं से एक को उठाया और खोल कर देखा तो उस मैं सचमुच खून के निशान थे इस का मतलब बुआ को भी वही हो रहा है जो उन लड़कों ने बताया था और यह हर जवान लड़की को हर महीने होता है यह सब सोच सोच कर मेरा लण्ड तन गया और मैं बिस्तर पर लेट कर अपना लण्ड रगड़ने लगा जब खूब देर लण्ड को रगड़ा तब उस मैं से वही पानी निकला ओर मैं शांत हो गया
क्यों की हर बात मैं अपने दोस्तों से नहीं पूछ सकता था इस लिए उसी दिन बाजार जा कर एक गन्दी निताब ले आया जिस का नाम था “गुप्त ज्ञान” शाम तक मैं ने छत पर जा कर उस किताब को पूरा पढ़ा उस किताब मैं सेक्स के बार मैं बहुत कुछ लिखा था और कई फोटो भी थे ? लण्ड और चूत की कैसी कैसी बनावट होती है, चुदाई कैसे की जाती है ? चुदाई के अलग अलग आसान भी दिखाए गए थे ! माहवारी कब और क्यों आती है ? बच्चे कैसे होते हैं ? वगैरह वगरह अब यह साफ़ हो गया बुआ मेरे साथ साथ चुदाई करने लगी थी किताब पढ़ते पढ़ते मैं अपने लण्ड को रगड़ रहा था जिस से मैं दो बार पानी निकाल चुका था पर फिर भी वह शांत नहीं हो रहा था उस दिन मैं ने अपने लण्ड को रगड़ रगड़ कर तीन बार पानी निकाल था पर वह शांत ही नहीं हो रहा था और मैं अपनी गुप्त ज्ञान वाली किताब मैं यह भी पढ़ चूका था की इस तरह पानी निकालने को हस्त मैथुन कहते हैं और ज्यादा हस्त मैथुन करने से जवान लड़कों को कमज़ोरी भी आ जाती है यह सोच सोच कर मैं तनाव मैं था मगर मुझ से रुका ही नहीं जा रहा था
तीसरे दिन मुझे यह देखने की इच्छा हुयी की क्या बुआ की चूत भी वैसी ही थी जैसी किताब मैं लिखी थी ? और मुझे बुआ के बदन को पूरा देखना था इस लिए जैसे ही वह नहाने गयी मैं बाथ रूम के दरवाजे के पास चला गया. घर पुराना होने की वजह से बाथरूम के दरवाजे मैं कई छेद थे मैं ने उन मैं से एक छेद पर अपनी एक आँख टिका दी उफ्फ्फ क्या नज़ारा था ? बुआ अपना ब्लाऊज़ और ब्रा उतार चुकी थीं और उन के मस्त मस्त मोम्मे मेरे सामने थे उन के निप्पल गहरे काले रंग के थे और खूब बड़े बड़े थे बुआ का नंगा बदन देख कर मेरी साँसे तेज चलने लगी और लण्ड फिर तन गया फिर बुआ ने अपना पेटीकोट खोला आज उन्होंने मेरा ही एक कच्छा भी पहना हुआ था तब उन्होंने कच्छा उतार तब मैं ने देखा की उनकी चूत पर एक कपडा लगा हुआ है और उस कपडे को जगह पर लगाए रखने के लिए बुआ ने अपनी कमर के चारों तरफ एक नाडा बाँधा हुआ है और कपडे के दो किनारे उस मैं फंसा रखे हैं फिर उन्होंने अपनी कमर के चारों तरफ लिपटा हुआ फीता भी खोल दिया और चूत पर लगा कपडा हटा दिया उस पर खून का धब्बा बना हुआ था यह देख कर मुझे विश्वास हो गया की खून थोड़ा थोड़ा ही आता है बहुत ज्यादा नहीं और इस सब मैं मेरी प्यारी प्यारी बुआ को दर्द भी नहें झेलना पड़ता फिर बुआ नहाने लगी बड़ा ही मस्त नज़ारा था मैं ज़िंदगी मैं पहली बार औरत का नंगा बदन देख रहा था बुआ ने मल मल कर नहाया, अपनी चूत को अच्छी तरह साफ़ किया और फिर तौलिया ले कर बदन को सुखाया इस बीच मुझे उन के बदन के अच्छे से दर्शन हुए।
उन के मोम्मे भारी भारी थे और चूतड़ खूब गोर और गोल गोल थे। उन की चूत गहरे काले रंग के बालों से ढकी हुयी थी (गुप्त ज्ञान की किताब से अब मैं जान गया था की इन बालों को झांट भी कहते हैं ) और पीछे गांड का छेड़ था जो पूरी तरह बंद था और गुलाबी था
जब बुआ नहा कर उठीं तो पानी की एक दो बूँदें उन की झांटों से लटक रही थी झांटों के बीच वह गुलाबी छेद भी थोड़ा थोड़ा दिख रहा था जहां लण्ड ले कर कर बुआ ने मुझे मर्दों वाला सुख दिया था
बदन सुखाने के कपडे पहने आज बुआ ने कपडा नहीं लगाया और कच्छा भी नहीं पहना जब वह नहा कर बाहर आईं और कपडे सुखा रही थीं तब उन्होंने मुस्कुरा कर मुझे कहा “बस आज पूरा हो गया”
मैं समझ गया वह किस बात को पूरा होने कह रहीं है और यह बात साफ़ थी उन की माहवारी पूरी हो चुकी थी और आज रात वह फिर मेरे साथ सेक्स करेंगी। मैं बेसब्री से रात का इंतज़ार कर रहा था। शाम को बुआ ने बड़े प्यार से खाना खिलाया और हम बिस्तर पर आ गए अब सोने का नाटक करने की हम दोनों को जरूरत नहीं लग रही थी इस लिए हम दोनों एक दुसरे से चिपट गए और किसी भी मर्द और औरत की तरह सेक्स मैं आगे बढ़ते गए, इन दिनों पढ़ी हुयी गन्दी किताबों से प्राप्त ज्ञान का प्रयोग करते हुए मैं बुआ के अंगों से खेल रहा था जिस से हम दोनों की मस्ती सातवें आसमान पर थी। बुआ भी आज एक दूसरी ही औरत लग रही थी और भूखी शेरनी की तरह मेरे शारीर को नोच खसोट यही ही उस रात तो हम पूरी रात यही करते रहे और पांच बार एक दुसरे के शरीर को पूरी तरह भोगा सुबह जब मैं उठा तब मुझे लगा अब मैं लड़का नहीं रहा मर्द बन गया हूँ और उस दिन से मैं अपनी बुआ का मर्द बन गया
बुआ का मर्द बन जाने की वजह से मुझे बुआ को ले कर चिंता भी थी, मैं ने उन को समझाया की इस तरह सेक्स करने से वह माँ भी बन सकती हैं , तब उन्होंने पूछा “ उस के लिए क्या करना चाहिए” मैं ने अपनी गुप्त ज्ञान वाली किताब मैं पढ़ा था की बच्चा के लिए कुछ उपाय किये जा सकते हैं. और इन उपाय के लिए डॉक्टर से बात करनी चाहिए.
इस के लिए मैं और बुआ छुप कर शहर गए और एक डॉक्टर से सब बात करी, डॉक्टर से बात करने के बाद अपने अंदर कॉपर टी लगवा ली और हम निश्चिन्त हो कर सेक्स करने लगे। इश्वर की लाख कृपा थी की बुआ ने यह खेल अपनी माहवारी के 18 दिन बाद शुरू किया था इस लिए शायद वह पहले ही महीने प्रेग्नेंट होने से बच गयी
मेरे कहने पर बुआ ने अपने पूरे बदन को मुझे देखने दिया। इस काम के लिए वह पूरी नंगी हो कर मेरे सामने लेट गयीं और मैं ने किताब ले कर उन की चूत, गांड का एक एक हिस्सा छू छू कर देखा इस तरह उनकी चूत के दाने और दोनों छेदों का पूरा पता चल गया (उस से पहले मैं सोचता था की वहाँ एक ही छेद होता है। किताब और बुआ की मदद से पता चला की मूतने का छेद अलग होता है और चुदाई का अलग। मैं ने उन के छेदों को कई बार चूमा और चाटा। बूआ के भगांकुर को छेड़ छेड़ कर उन्हें मजे दिए और किताब और बुआ की मदद से उन के जी स्पॉट का भी पता लगाया और जब उस को रगड़ रगड़ कर मजा दिया तब बुआ इतना शोर मचा कर झड़ी की मुझे डर लगने लगा की कोई सुन न ले (वैसे मैं आप सभी को यह बता दूँ की हर औरत की चूत की बनावट थोड़ी अलग सी होती है , किसी की चूत के होंठ मोठे होते हैं तो किसी के पतले और उन के रंग भी अलग अलग होता है। .मेरी मम्मी की चूत के होंठ बहुत मोठे और काले हैं जब की बुआ के पतले और गुलाबी )
ऐसे ही चुदाई करते और मस्ती करते 25 दिन बीत गए और बुआ की माहवारी के दिन फिर से आ गए और बुआ ने सेक्स बंद कर दी। अब तो मुझ से रहा नहीं जा रहा था इस लिए मैं ने उनको खींच खांच कर खून से भरी चूत मैं ही लण्ड घुसा दिया और सेक्स की, बुआ ने मुझे रोका नहीं मगर गीलेपन की वजह से हम दोनों को मजा नहीं आया और बुआ के सारे कपड़े और बिस्तर भी खराब हो गए। अगले दिन मुझे परेशान देख कर मेरी प्यारी बुआ ने मुझे अपनी गांड गिफ्ट मैं दे दी उस रात उन्होंने मेरे लण्ड को अपनी गांड मैं लिया इस मैं हम दोनों को बहुत मजा आया उस के बाद मुझे कभी भी बुआ की माहवारी के दिनों मैं बिना चुदाई के नहीं रहना पड़ा, बुआ मेरा लण्ड अपनी गांड मैं ले कर मुझे मजे देती और खुद भी मजे लेती (पुष्पा बुआ ने किस तरह मुझे अपनी गांड गिफ्ट मैं दी वह एक अलग कहानी है उस को पढ़ कर आंनद लें )
क्यूंकि हम दोनों कभी कभी दिन मैं भी चुदाई करते थे इस लिए मम्मी जब भी दिन मैं हमारे कमरे मैं आती थी उन्हें अपने अनुभव से चुदाई की खुशबु मिल जाती थी कई बार मम्मी ने बंद दरवाजे को खटखटा कर हमें उठया और बुआ के कपडे अस्त व्यस्त रहते थे। धीरे धीरे उन्हें शक ज्यादा होने लगा और एक दिन उन्होंने मेरे सामने ही बुआ से पूछ ही लिया “तुम दोनों के बीच क्या चल रहा है आज कल ? “
मुझे लगा बुआ कुछ झूठ बोल कर निकल लेंगी , मगर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ :” भाभी आप का बेटा जवान हो गया है , जवान लड़का घर से बाहर जा कर कुछ करे उस से अच्छा है उस की जवानी को घर के अनुभव से। …
“ओह हो, मगर अकेले अकेले क्यों ? मम्मी ने बुआ से जिरह की
“भाभी आप का हक़ तो पहले है, जब चाहे मजे लो अपने बेटे की जवानी की, सच कहती हूँ, इस का मूसल अपनी भट्टी मैं ले कर देख अपने सारे बूढ़े आशिकों को भूल जाओगी “ बुआ ने पलट कर जवाब दिया,
“तू तो जला रही है मुझे ! “ मम्मी की आवाज मैं सच मैं जलन थी
विजय जरा दिखा ही दे अपनी मम्मी को अपना हथियार फिर मानेगी यह कि मैं ने जो बचपन से तेल मालिश करी थी इस की नुन्नू को इतना बड़ा करने के लिए कितनी असरदार थी
मैं तो यह सब बातें सुन कर भौंचका खड़ा था इस लिए ऐसा कुछ नहीं किया मगर बुआ ने आगे बढ़ कर मेरे बॉक्सर्स को नीचे खिसक दिया और मेरा लंड सीधा तना हुआ था , इस अवस्था मैं कम से काम दस इंच का होगा
“बाप रे “ यह तो सच मैं आदमी नहीं गधे का लंड लगता है , कैसे ले लेती है तू इस को अपनी राम प्यारी मैं”
मैं ले कर दिखाऊं या आप खुद ट्राई करेगी, कहीं डर तो नहीं लगने लगा आप को ?
आह डरें मेरे दुश्मन, लंड खाने मैं मेरी चूत का कोई जवाब नहीं “ मम्मी बोली
“हाँ यह तो तू सही कह रही हो , पर आज तक ऐसा वाले तो नहीं मिला होगा सच बताना ?”
हाँ सच तूने बड़ी मेहनत की है, देखते ही चूत पनिया गयी है “ मम्मी बिलकुल चुदास औरत की तरह बोली
फिर बुआ ने मम्मी का पेटीकोट उठा कर उन की पेंटी नीचे सरका दी और मुझे मेरी माँ की तरफ धकेल दिया
मैंने मम्मी का पलट कर किचन की स्लैब के सहारे खड़ा कर दिया और उन के पीछे जा कर उन की चूत मैं लंड घुसाने लगा , अब तक मुझे चूत मैं लंड घुसाने का काफी अनूभव हो गया था था इस लिए मैं ने अपने घुटनों को थोड़ा मोड़ा जिस से मेरे लंड की टिप मम्मी की चूत के द्वार तक आ जाये फिर मम्मी की टांगों को थोड़ा फैला और एक हाथ से लंड पकड़ा और दुसरे हाथ से मम्मी की चूत की फांकों को खोलते हुए लंड अंदर धकेलना शुरू किया, मम्मी ने किचन की स्लैब को कस कर पकड़ लिया और उन के मुंह से आह निकल गयी
मैं धीरे धीरे अपने लंड को अंदर डालता गया और जब वह मम्मी की चूत के अंदर तक चला गया तब भी दो तीन इंच बहार था
फिर मैं ने अपनी माँ की चूत पेलना शुरू किया
बुआ वहीं खड़ी मुझे ऐसे देख रही थीं जैसे रेस मैं उन का घोडा रेस जीत रहा हो
मम्मी के बूब्स बुआ के बूब्स से भारी थे मगर उन की चूत बुआ की चूत से ढीली थी
करीब बीस मिनट मम्मी की चूत को पेलने के बाद मम्मी की चूत ने रस छोड़ दिया और वह खल्लास हो गयीं
फिर मैं ने तेज तेज धक्के मार कर अपना माल उन के अंदर गिरा दिया , जब मेरा लंड पक्क की आवाज करते हुए उन की चूत से बहार निकल तो ढेर सारा माल टांगों पर होते हुए नीचे जा रहा था
“भाभी मजा आया , अपने बेटे का लण्ड खा कर
हाँ सच मैं तू ने इस को एक्सपर्ट बना दिया है, सही कह रही थी तू, असली मजा तो इन जवान लोगों के लंड लेने मैं ही है, बूढ़े तो पानी अंदर दाल कर ठन्डे पड़ जाते हैं
फिर मम्मी मुझ से बीच बीच मैं चुदवा लेती थी, इस मैं मम्मी को बहुत मजा आता था पर मुझे बुआ के साथ ही ज्यादा मजा आता था
मम्मी की मदद से और उन्ही के सुझाव से मैं ने बुआ से गुप्त विवाह किया और उन के साथ सुहाग रात मनाई, मम्मी ने हम दोनों को शादी के लिए पूरी तरह तैयार किया, मेरे लिए चुपके से शेरवानी और बुआ के लिए शादी का लहँगा खरीदा गया। शुरुआत मैं मैं ने बुआ के गले मैं और बुआ ने मेरे गले मैं वर माला डाली , उस के बाद हमारे फेरे हुए. मैं ने बुआ को एक नया मंगल सूत्र पहनाया और उन की मांग अपने हाथ से भरी, मम्मी ने बुआ को मेरे नाम ने बिछवे पहनाये और शादी की गिफ्ट के रूप मैं बुआ को एक बहुत ही सेक्सी नाइटी दी जिस मैं बदन दीखता ज्यादा था और छुपता काम था फिर हम अपने सजे हुए बिस्तर पर आ गए।
बुआ ने बड़ी अदा नयी दुल्हन की तरह लजाते हुए मुझे दूध पिलाया और मेरा जूठा ढूध पिया। मैं ने उन का घूघट उठाया और इस सब मैं मम्मी ने हमारी कई सारी रोमांटिक फोटो खींची, जिन मैं बुआ और मैं धीरे धीरे नंगे होते गए, मैं ने देखा की बुआ की झांटे एक दिल की शक्ल मैं ट्रिम की हुयी थी यह भी मम्मी का ही आईडिया था और उन्होंने ही बनाया था
मैं इस रात की याद मैं उन की नंगी कमर पर सोने की तगड़ी पहनाई इस समय शरीर पर बस वहीं एक तगड़ी थी औऱ उन के माखन से चिकने और दूध से सफ़ेद बदन पर सिर्फ एक सोने की तगड़ी थी
इस के बाद मम्मी कमरे से चली गयी और हम ने रात भर जम कर चुदाई की
इस शादी के बाद मम्मी की ज़िद थी की हम दोनों हनीमून पर भी जाएँ, मगर मेरे और बुआ को समझ नहीं आ आ रहा था यह कैसे हो सकता है, यहां भी मम्मी ने पूरी मदद की
उन्होंने घर मैं यह कह दिया की बुआ को चेक उप के लिए दिल्ली जाना पड़ेगा और मुझे उन के साथ जाना पड़ेगा, घर मैं किसी को इस बात से कोई प्रॉब्लम नहीं थी. फिर हम लोग दिल्ली गये और एक दिन दिल्लीः मैं होटल मैं रहे। दिली मैं बुआ ने ज़िद कर के अपनी चूत के ऊपर मेरे नाम का टैटू बनवाया जिस मैं VS लिखा था अगले दिन सुबह कुल्लू के लिए फ्लाइट पकड़ी और फिर कुल्लू से टैक्सी ले कर मनाली के लिए निकल गए
उस वक़्त बुआ ने टाइट टॉप और स्कर्ट पहना हुआ था और स्कर्ट के नीचे पेंटी भी नहीं पहनी हुयी थी इस वजह से मैं कार मैं ही बुआ की चूत के साथ खेल सकता था, मैं ने भी अपनी पैंट की ज़िप खोल ली और ड्राइवर की नज़र बचा आकर हम दोनों एक दुसरे के गुप्तांगों के साथ खेल रहे थे
हम ने मनाली के पास एक कॉटेज बुक कर रखा था मैं ने देखा की बुआ का सूटकेस बहुत ही हल्का है मैं हैरान रह गया और बुआ से पूछा "अरे पुष्पा यह तो बहुत हल्का है " (अब मैं बुआ को उन के नाम पुष्पा से बुलाने लगा था )
“मनाली पहुँच कर बताती हूँ - क्यूँ इतना हल्का है : बुआ ने बताया - अब मुझे मनाली आने का और भी बेसब्री से इंतज़ार था
कमरे मैं जाते ही मैं ने सब से पहले बुआ का सूटकेस खोल दिया, उस मैं सिर्फ़ वही सेक्सी वाली नाईटी और दो तीन ब्रा और पेंटी थी और कुछ भी नहीं था
“पुष्पा तुम अपने कपडे क्यूँ नहीं लायी ?” मैं ने उन से पूछा
अरे मेरे प्यारे बलमा ! हनीमून पर कपड़ों का क्या काम ? मैं तो 3 दिन आप के सामने अपने जनम दिन वाली ड्रेस मैं ही रहूंगी” और बुआ हंस कर बोली और मुझ से चिपक गयी
मुझे भी यह सुन कर हंसी आ गयी और मुझे बाहों मैं ले कर चूमने लगे
होटल के हनीमून सूट का माहौल प् कर हम दोनों एक दूसरे को भूखे शेर की तरह चूमने लगे, उस समय हम दोनों के बदन एक दूसरे से ऐसे जुड़े थे कि बीच में से हवा भी नहीं गुजर सकती थी।
मैं बुआ की गर्दन, कान चूमे जा रहा था और वह मेरे लंड को सहला रही थी फिर मैं ने उन का टॉप उतारा और मस्त मस्त चूचियों को दबाने लगा ब्रा बुआ ने खुद ही उतारी और मेरे मुंहमैं अपनी चूचियां घुस थी। मुझे उन के स्तन पीने मैं बड़ा मजा रहा था और बुआ भी मस्त हो चुकी थी
फिर मैं ने बुआ का स्कर्ट का नाडा तोड़ कर अलग किया और नीचे गिरा दिया , पेंटी तो उन्होंने पहनी ही नहीं थी इस लिए बुआ अब मेरी बाहों मैं पूरी नंगी थी, कमरे मैं एक तरफ शीशे के बाहर पहाड़ का सुन्दर नज़ारा था और मेरी बाँहों मैं मेरी प्यारी बुआ थी, जब मैं घूम तो मैं ने देखा की कमरे की दूसरी दीवार पर बड़ा सा शीशा था जिस मैं हम दोनों के नंगे लिपटे हुए बदन दिख रहे थे क्योंकि यह एक हनीमून सूट था इस लिए कमरे की हर चीज़ सेक्स की इच्छा को बढ़ाने के लिए बनायी गयी थी
बुआ का बदन को चूमते चूमते मेरा मुँह उन की बुर पर चला गया और फिर मैं ने उनकी बुर चूमना-चूसना शुरू कर दिया। इस से बुआ के पूरे शरीर में तरंगे दौड़ने लगी .
हम दोनों की सांसें तेज़ हो चुकी थी, तब बुआ ने गरम गरम साँसों के बीच मेरे कान मैं कहा - “जानू अपने भुजंग को पिंकी से मिला दो , अब मेरी पिंकी से और नहीं रुका जा रहा. (इस दिन के बाद से बुआ मेरे लंड को भुजंग के नाम से बुलाती हैं और मैं उन की चूत को पिंकी कह कर बुलाता हूँ, बाद मैं हम दोनों ने ऐसे उर बह कई नाम रखे हैं जो मैं आप को समय समय पर बताऊंगा ) ..
मैं ने बुआ की टाँगे फैलाई और उन की टांगों ने बीच बिस्तर पर घुटने के बल आ गए जिस से मेरा लंड उन की रस से लबालब चूत के सामने आ गया ! फिर मैं ने बुआ की जाँघों को उठाया और टांगों को अपने कन्धों पर रख लिया। बुआ जानती थी जब मुझे उनकी गहराई का पूरा मजा लेना होता था तब ऐसा करता हूँ। फिर अपने काले भुजंग को बुआ की पिंकी के छेद पर रख कर एक धक्के से उस को अंदर घुसा दिया पिंकी इस हमले के लिए पूरी तरह तैयार थी इस लिए भुजंग सीधा बुआ की बच्चेदानी के मुंह तक चला गया, जैसे ही वह मेरी बच्चेदानी के मुंह पर टकराया एक मीठी सी दर्द हुयी। बुआ ने मुझे बताया था की जब मेरा लंड उन की चूत मैं पूरा उत्तर जाता है तो बच्चेदानी के मुंह पर मीठे सी दर्द होती है, और वह चाहती हैं की यह दर्द उन को जीवन भर हो और दुनिया की हर औरत को ऐसी दर्द मिले
फिर हम दोनों ताल मैं ताल मिला कर चुदाई करने लगे
कमरा फचफच की आवाज़ से गूंजने लगा और होटल का भारी भरकम बेड भी हिलने लगा
करीब 20 मिनट तेज चुदाई के बाद मेरी साँसे कुछ ज्यादा तेज हो चली थी इस लिए बुआ ने मुझे पलट दिया और मेरे ऊपर चढ़ कर चुदाई जारी रखी
बुआ ऊपर नीचे होने के साथ साथ अपने चूतड़ों को गोल गोल भी घुमा रही थी जिस से मेरे लंड की जड़ उन की चूत के होंठों पर रगड़ खा रही थी इस से चूत नदी की तरह रस बहाने लगी और मेरी जाँघों के बीच से नीचे बिस्तर पर बेडशीट गीली हो गयी पर हम दोनों को इस का कोई ध्यान नहीं था और हम घचाघच चोदे ही जा रहे थे
मेरी आँखें बंद थी और बुआ के मोम्मे खींच खींच कर मसल रहा था, उन के निप्पल दबा रहा था और चूतड़ मसल रहा था , बुआ ने मेरी छाती से दबा रखा था और फच फच फच फच लंड को चूत मैं अंदर बाहर कर रही थी
फिर बुआ के हाथ मेरी छाती पर रगड़ खाने लगे यह एक इशारा था कि बुआ प्रेम की चरम अवस्था पर जाने वाली हैं और वह चाहती हैं के मेरा माल गोटियों से निकल उन की बच्चेदानी मैं जाये तो भरपूर मजा आएगा बुआ ने मुझे बताया था की जब वह झड़ रही हों उसी वक्त अगर गरम गरम माल चूत मैं घुसे तो जो मजा आता है उस को शब्दों मैं बताना मुश्किल हैं। बुआ की जरूरत समझ का मैं ने अपने आप लको ढीला छोड़ दिया मेरे माल की पिचकारियाँ बुआ के अंदर जाने लगी
“आह - उह्ह्ह - मेरे रज्जा मेरे प्यारे … उह्ह्ह कितना मजा। ..आअह्ह्ह “ बड़ी जोर से बोलते हुए बुआ झड़ती गयीं। घर मैं इस तरह की आवाजें करते हुए झड़ने का मौका नहीं मिलता था
फिर वह एक कटे पेड़ की तरह मेरे ऊपर गिर पडी और मैं ने मुझे अपनी बाहों मैं बाँध लिया ! हम दोनों की जीभें एक दुसरे के मुंह मैं समां गयी , लगभग 5 मिनट बाद जब बुआ मुझ से थोड़ा लग हुयी तो माल से सन लंड चुत से बाहर आ गया और बुआ ने नीच जा कर अपनी अपनी जीभ निकाल चाट चाट कर पूरी तरह साफ़ कर दिया अब मेरा भुजंग बस वह मेरे थूक से गीला था और खूब चमक रहा था
थोड़ी देर ऐसे ही लेटने के बाद मैं ने बुआ से पूछा "पुष्पा मेरी जान कुछ खायेगी पीयेगी भी या यूँ ही चुदाई करती रहेगी ?
बुआ झट से ने जवाब दिया "हाँ जानू , तेरा मीठा मीठा माल और पीना है " यह सुन कर हम दोनों हंस पड़े
मैं ने होटल का मीनू कार्ड उठाया और लंच का आर्डर दे दिया
चल कुछ कपडे पहन ले वैटर खाना ले कर आने ही वाला होगा
नहीं मैं तो जब तक हनीमून पर हूँ बिना कपड़ों के ही रहना है , यह कह कर बुआ ने कम्बल ओढ़ लिया
ऐसी चुदक्कड़ बीवी सब को मिले " कह कर मैं ने पायजामा डाला और तभी दरवाजे की घंटी बज उठी
मैं ने दरवाजा खोला और वैटर ने अंदर आ कर टेबल पर खाना लगा दिया, बुआ पूरी नंगी कम्बल ओढ़े लेटी रही
वैटर ने सभी प्लेट्स लगाने के बाद मुझे एक छोटी प्लेट जो कपडे से ढंकी हुयी थी मेरी तरफ बढ़ा दी , मैं ने कपडा हटा कर देखा तो नीच तरह तरह के कंडोम रखे हुए थे, वेटर मंद मंद मुस्कुरा रहा था और टिप की उम्मीद कर रहा था मैं ने सो रपये का एक नोट निकाल कर उस को दिया और वह “sir enjoy yourself” बोल कर चला गया
वेटर के जाने के बाद बुआ कम्बल से निकली और बाथरूम की तरफ चल दी, मैं बुआ के पीछे पीछे बाथरूम मैं आ गया
बुआ बाथरूम मैं सु सु कर रही थी और मेरे मैं उन को देख रहा था, घर मैं हमारे कमरे से बाथरूम जुड़ हुआ नहीं था इस लिए इस तरह नंग धड़ंग नहीं घूम सकते थे , यहां होटल मैं यह बहुत मजे आ रहे थे, बुआ तो ऐसे महसूस कर रही थी जैसे उन को जीवन मैं फिर इतनी मस्ती नहीं मिलने वाली
थोडा हाथ मुंह धो कर बुआ वैसे ही खाने की टेबल पर आ गयी और मेरी गोद में जा बैठी
ऐसे ही हम ने खाना खाया और खिलाया और फिर से बिस्तर पर आ गए
अब की बार मैं ने बुआ को कुतिया बना कर अपना लंड उनकी चूत मैं पीछे से घुसा दिया और क्योंकि उन का छेद मेरे और उन की पहली चुदाई के रस से भरा हुआ था इस लिए लंड को चूत मैं घुसने मैं कोई समय नहीं लगा इस बार चुदाई बहुत लम्बी चली
अगले दो दिन और दो रात मैं बुआ ने कुल 13 बार मेरा लंड अपनी चूत, गांड और मुंह मैं लिया , वापिस की बस यात्रा मैं रात के समय हम दोनों अपने ऊपर कम्बल डाल आकर एक दुसरे से मस्ती करते रहे
इन तरह बुआ पूरी तरह मेरी हो गयीं।
बुआ ने ही मुझे मम्मी और घर के सब लोगों की दास्ताँ सुनायी उन्होंने मुझे यह भी बताया की फूफा ने उन की चूत कभी भी नहीं मारी और उन की चूत की सील मेरे लंड से ही खुली थी।
बुआ ने ही मुझे बताया की मम्मी के छोटी बहन सुमन पूरी तरह मम्मी के नक़्शे कदम पर ही है उस की सील भी संजय या पंकज मामा ने तोड़ी थी, फिर जब उस की शादी हुयी तो उस के पति का लंड छोटा था इस लिए अपने पति को छोड कर अपनी मम्मी यानी मेरी नानी के पास आ गयी थी और वहाँ संजय और पकंज मामा मौसी और नानी साथ साथ रह रहे थे
एक बार मम्मी तीन दिनों के लिए नानी के घर गए, मेरी नानी 50 साल की होए के बाद भी एक मस्त औरत है, उन्होंने अपने आप को बहुत मेन्टेन कर के रखा हुआ है, वह रोज़ योग और एक्सरसाइज करती और महीने मैं काम से काम दो बार पार्लर जाती हैं , इस से उस का बदन एक दम छरहरा है , चेहरे पर चमक है और फिगर एक डैम सेक्सी है , वह मेरी मम्मी और मौसी से कुछ ही बड़ी लगती हैं
मुझे मम्मी साथ नानी के घर कानपूर जाने को बोला गया, मैं उदास था क्यों की मैं बुआ को तीन चार दिन के लिए भी छोडना नहीं चाहता था , मगर बुआ ने मुझे जाने को बोला और बोली “जा तुझे वहाँ बहुत अच्छा लगेगा” “शायद बुआ जानती थी और चाहती थी की कानपुर मैं मेरे साथ क्या क्या होने वाला है
वहाँ जा कर मैं ने देखा की घर का हर मर्द हर औरत को चोद लेता है। मेरी मम्मी तो जाते ही इस माहौल मैं रम गयी और मुझे भी इस मैं शामिल कर लिया गया, मौसी और नानी इस लिए खुश थी की उन्हें मेरा लंड जिस के बारे मैं बहुत दिनों से सुन यही थी मिल गया था और मम्मी, संजय और पंकज मामा इस लिए खुश थे की उन्हें अपना पुराना प्यार (मेरी मम्मी) मिल रही थी। इस तरह तीन दिन लगातार चुदाई हुए और मुझे कई नए अनुभव मिले
मामा, मौसी और नानी की चुदाई देख कर मुझे चुदाई के कई नए आसनों के बार मैं पता चला। अब मुझे यह सब बुआ के साथ करना था
संजय और पंकज मामा नानी को सैन्डविच बना कर चोदते थे इस मैं एक मामा नानी की चूत और एक उनकी गांड मैं लंड घुसा देता था और फिर थोड़ी देर चोदने की जगह आपस मैं बदल लेते थे, नानी को भी ऐसे चुदने मैं बहुत मजा आता था
दोनों मामा ने एक दिन मम्मी की चूत मैं एक साथ दो लंड घुसा कर मुझे दिखाया यह काफी मुश्किल काम हैं और तीनो लोगों को एक ख़ास पोजीशन बना कर ही ऐसा हो सकता है
मौसी चुदाई से पहले बहुत मस्ती करवाती थी. . उन की सेक्स का हर दिन एक नई चीज़ ले कर आया। पहले दिन उन्होंने वह म्यूजिक चला कर धीरे धीरे डांस करते हुए कपडे उतारे और चूतड़ हिला हिला कर ऐसा डांस किया की सारे दन मैं सनसनी सी फेल गयी। उन्होंने सेक्स से पहले कई और मस्त हरकतें की जैसे एक रुमाल ले कर चूत साफ़ करती और उस को सूंघने को दे देती सच मैं इस से सेक्स का मजा बढ़ जाता है, वह अपनी चूत मैं पहले केला घुसा लेती और फिर उस को खाने के लिए कहती या फिर चूत पर शहद लगा कर चटवाती थी और अपनी चूत मैं शैम्पेन भर के चूत पर मुंह लगवा कर सीधे शैम्पेन पिलवाती थी। आखिरी दिन मौसी ने सेक्स से पहले मस्त तरीके से झांटें शेव की और अपनी झांटें भी शेव करवाई , मौसी को मर्दों के साथ शावर मैं नहाते हुए सेक्स करना भी बहुत अच्छा लगता था
नानी के घर मैं गौरी नाम की एक नौकरानी थी। इन लोगों ने मुझे गौरी को भी चोदने दिया। साली बड़ी ही मस्त माल थी, ब्रा और पेंटी पहनती नहीं थी इस लिए उस के मोम्मे ब्लाउज फाड़ कर बाहर आते हुए प्रतीत होते थे। उस का जुआरी पति उस को पैसों के लिए बहुत परेशान करता था इस लिए वह पैसे ले कर चुदवाती थी। गौरी मर्दों को खुश करने की हर एक कला जानती थी , जितना अच्छा लंड वह चूसती थी उस से बढ़िया लंड चूसने वाली औरत मुझे आज तक नहीं मिली, उस को मूत पीने, मूत्र स्नान और मर्दों के सामने टाँगे फैला कर मूतने मैं विशेष मजा आता था. मूतने के समय उस की चूत से सीटी जैसी आवाज आती थी उसी ने मुझे बताया की यह आवाज उस की चूत के होंठों की बनावट की वजह से है, फिर मैं ने मम्मी, मौसी और नानी की जिन औरतों ने कई मर्दों के लैंड लिए होते हैं उन की छूट से पेशाब करते समय ऐसी आवाज होती है , मैं ने मौसी, नानी और मम्मी को भी मूतते हुए देखा और पाया की उन की चूत से भी सीटी जैसी आवाज मगर उतनी तेज नहीं जितनी गौरी के मूतते वक्त होती थी
मुझे बुआ की बड़ी याद आ यही थी। मैं रोज़ ही उन से फ़ोन पर लंबी बात करता था और एक दिन हमने फ़ोन सेक्स भी किया।
गौरी और मौसी की यह हरकतें मेरे लिए बिलकुल नया अनुभव था और मैं यह सब उस औरत के साथ करने को बेताब हो रहा था जिस ने मुझे अपना कोरा बदन मुझे दिया था यानी मेरी बुआ। मुझे पूरा विश्वास था की मेरी प्यारी बुआ यह सब खुशे खुशी करेगी और शायद इसी लिए उन्होंने मुझे कानपुर भेजा था
वापिस अपने घर आने पर मेरी और बुआ की सेक्स लाइफ और भी मस्त हो गयी, मगर बुआ की चूत से मूट करते वक़्त आवाज नहीं होती थी, तब बुआ ने बताया की फूफा जी ने उन्हें चोदा ही नहीं और उन की चूत के सील मेरे लण्ड से खुली थी
कुछ समय बाद मेरे दिल मैं यह इच्छा होने लगी की मैं अपनी प्यारी बुआ को अपने बच्चे की माँ बनाऊं, बुआ भी चाहती थी की मेरी हर इच्छा पूरी हो मगर उन्हें समझ नहीं था यह इच्छा कैसे पूरी हो सकती है। मगर ईष्वर की कृपा से जल्दी ही ऐसी परिस्थिति बनी की मेरी यह इच्छा भी पूरी हो गयी
फूफा जी के एक मित्र “राकेश अंकल” थे वह अमेरिका मैं रहते थे और साल मैं एक बार भारत आते थे और उस दौरान एक दो दिन हमारे साथ बिताते थे। बुआ ने मुझे बताया की वह जब भी हमारे यहां आते है तो मम्मी के साथ अपनी हवस पूरी करते हैं की इस घर मैं बहुत सी ऐसी बातें हो रही थी जो बाहर नहीं जा सकती थी इस लिए फूफा जी अउर उन के मित्र की यह मांग पूरी हो जाती थी
इस बार ऐसा कुछ हुआ की पहली रात जब अंकल मम्मी के साथ सोये तो मम्मी माहवारी पर थी और अंकल अपनी ठरक शांत नहीं कर पाए, अगले दिन फूफा ने बुआ को बुला कर बोला की उन्हें रात को राकेश अंकल के साथ सोना पड़ेगा, यह सुन कर बुआ बहुत गुस्सा हुयी और लगभग रोते हुए मेरे पास आयी। सब सुन कर मैं ने बुआ को समझाया की यह मेरी इच्छा को पूरा करने का सुनहरा मौका है और अपनी प्लान बतायी, मेरी प्लान की मुताबिक बुआ राकेश अंकल के साथ सोने के लिए तैयार हो जाएंगी और हम अंकल के दूध मैं नींद की गोली मिला कर पिला देंगे जिस से वह रात भर सोते रहे और सेक्स न कर पाएं। साथ ही बुआ कॉपर टी निकलवा देगी और भगवान ने चाहा तो एक महीना पूरा होते होते हमारा बच्चा बुआ की कोख मैं आ जाएगा
यह सुन कर बुआ खुश हो गयी और फूफा जी को बोल दिया की वह सिर्फ इस बार के लिए उन की बात मान लेंगी मगर आगे कभी ऐसा न हो
फूफा ने खुश हो कर बोला “पुष्पा मेरी जान तू कितनी अच्छी है, इश्वर तुझे सुखी रखे और तेरी हर इच्छा पूरी करे” कहते हैं कभी कभी किसी की जुबान पर सरस्वति बैठ जाती है और उस वक्त जो वह कहता है वह सच हो जाता है “शायद उस दिन फूफा जी की जुबान प् सरस्वती बैठी हुयी थी
रात मैं बिलकुल वैसे ही हुआ जो हम चाहते थे. राकेश अंकल बुआ के पास आये और उन्होंने नींद की गोली मिलाया हुआ दूध पिला दिया. कुछ मिनट बाद राकेश अंकल गहरी नींद मैं थे
फिर मैं ने बुआ को राकेश अंकल की बगल मैं लिटा कर चोदा । हम दोनों को ऐसी चुदाई हमें बहुत ही मजा आया। राकेश अंकल सुबह ही वापिस चले गए। फिर उस के बाद मेरी बनायी योजना के अनुसार बुआ थोड़ा लंगड़ा कर चल रही थी जिस से घर के लगों बाकी लोगों को यह लगे की रात को बुआ की सील टूटी हैं
अगले दिन ही उन के कॉपर टी निकलवा दी और हम भरपूर चुदाई करते रहे उस महीने उन की माहवारी नहीं आयी. हम ने छुप के शहर जा कर टेस्ट करवाया तो पता चला बुआ प्रेग्नन्ट हो चुकी हैं हम दोनों की खुशी का कोई पर नहीं था
अब शुरुआत हुयी इस को घर वालों को बताने की, अब कई झूठ बोले गए, फूफा जी और घर मैं जिन लोगों को यह पता था की फूफा जी सिर्फ गांड मारते हैं उनको यह कह दिया गया की यह बच्चा राकेश अंकल के साथ सोने की वजह से है और बाकी लोगों ने यह मान लिया की फूफा जी ने ही बुआ को गर्भवती किया होगा
यह झूठ काफी कुछ चल गए सिर्फ फूफा जी ने इस बचे को गिराने के लिए कहा , बुआ ने इस के लिए साफ़ मना कर दिया तो फूफा जे भी चुप हो गए.
मंगल एक गलती की वजह से फूफा जी की बहन सोनिया को शक हो गया, बुआ की प्रेगनेंसी की बात सुन कर सोनिया हमारे घर आयी हुयी थी । उस की शादी को पांच साल हो चुके थे मगर उस को बच्चा नहीं हो रहा था उस ने बुआ की डॉक्टर वाली रिपोर्ट देख ली जिस मैं आखिरी माहवारी का दिन लिखा हुआ था , इस से उस ने हिसाब लगा लिया की यह बच्चा राकेश अंकल का नहीं हो सकता और उस को फूफा जी के गांडू होने की बात पता थी , उस ने यह बात और किसी को तो नहीं बतायी मगर वह बुआ के पीछे पड़ गयी की यह बच्चा कैसे आया। क्योंकि सोनिया और लोगों ओ यह बात बता सकती थी इस लिए आखिर बुआ को उस को मेरे और बुआ के संबंधों के बार मैं बताना पड़ा
सब बात सोनिया ने बहुत ध्यान से सूनी, उस को मेरे और बुआ के संबंधों से कोई आपत्ती नहीं थी पर उस ने चुप रहने के लिए एक अजीब सी शर्त रख दी। उस की की शर्त के हिसाब से मुझे उस को एक महीने तक रोज़ चोदना होगा और इस के बाद अगर वह गर्भवती हो जाती है तो किसी को कुछ नहीं बताएगी और अगर वह गर्भवती नहीं होती है तो यह चुदाई आगे भी चल सकती थी और अगर मैं या बुआ इस के लिए मना करते हैं तो वह सब बात घर के लोगों को बता देगी
सोनिया की बात मान लेने के सिवाय हमारे पास और कोई रास्ता नहीं था, मगर मैं ने यह कह दिया की चुदाई सिर्फ और सिर्फ प्रेगनेंसी के लिए होनी है इस लिए सोनिया की माहवारी के आठवें दिन से 18 दिन के बीच ही होगी और आखिरी दिन टेस्ट कर के देखा जाएगा , अगर सोनिया प्रेनंग हो गयी तो और चुदाई नहीं होगी
सोनिया इस बात को मान गयी उन 10 दिनों सोनिया रात मैं चुपके से हमारे कमरे मैं आ जाती थी और हम तीनो एक ही बिस्तर पर सेक्स करते थे, मैं ने देखा की सोनिया को भी चुदाई मैं खूब मजा आता था
10 दिन बाद हम ने का घर पर ही सोनिया का प्रेग्नेंसी टेस्ट किया टेस्ट पॉजिटिव निकला और वह गर्भवती हो चुकी थी, वह खुश थी कि अब उस को कोई बाँझ नहें कह सकेगा मगर वह मुझे दिए हुए अपने वादे से मुकर गयी और यह कहने लगी की वह जब तक यहां है रोज़ चोदना ही पडेगा। मैं इस बात से बहुत नाराज हुआ पर बुआ ने मुझे समझ दिया की कोई ख़ास बात नहीं , अगर मैं किसी औरत को खुशी दे सकता हूँ तो क्यों न दूं.
सोनिया एक महीना रही और रोज़ चुदाई करी , उस के बाद वह खुशी खुशी अपने घर चली गयी और मैं और बुआ अपने आने वाले बच्चे के बारे मैं सोचने लगे
