Thursday, December 12, 2013

mera bheteeja mera yaar


सब से पहले तो मैं आप लोगों को अपने शरीर के बारे मैं बता दूँ मेरा रंग थोड़ा सांवला है और हाइट काम है मगर मेरे मोम्मे और चूतड़ दोनों खूब भारी हैं और मेरी कमर पतली है इस तरह मेरा शरीर खूब सेक्सी है और मेरे मन भी सेक्सी की बातैं खूब चलती रहती हैं मुझे चुदाई का खूब शौक है और मैं अपनी चूत को खूब साफ़ रखती हूँ और वहाँ के बाल साफ़ कर के रखती हूँ 

यह कहानी मेरी पहली चुदाई की कहानी है जो मेरे और मेरे जीजा जी के बडे भाई के बेटे (न) के बीच हुयी मैं उस की चुदाई से इतनी मस्त हुयी की उस की पत्नी की तरह चार साल उस के साथ रही 

जैसे ही जवान हुयी मेरे अंदर चुदाई की इच्छा तेज होती जा रही थी वैसे तो मेरे जीजा ने मुझे एक दो बार कोने मैं घसीट कर मेरे मोम्मे दबाने की कोशिश की थी और अगर मैं चाहती तो वह मुझे चोद ही देते मगर मैं अपनी बहिन का घर ख़राब नहीं करना चाहती थी इस लिए मैं ने अपने जीजा को ऐसा कुछ नहीं करने दिया 

सेक्स के मेरे दो प्रयास  विफल रहे सेक्स के इरादे से दो बार मैं गली के लड़कों को इशारा करके अपने साथ लाई मगर बिस्तर पर आ कर मुझे नंगा देख उन के लंड से पिचकारी निकल गयी और उन्हें सॉरी बुल कर भाग जाना पड़ा इन सब से मेरी चुदाई के आग और भड़क रही थी 

फिर इन मेरे जीवन मैं नीरज आया वह मेरी बहिन के घर रह कर पढ़ाई करने गाओं से आया था, गाओं मैं उस की चाची उस से चुदती है यह हमें पता था इस लिए मैं उस से चुदने की पूरी उम्मीद मैं थी 

उस के आने के पहले दिन से ही मैं उस को अपनी और आकर्षित करने के लिए सभी हरकतें करने लगी जब दीदी आस पास न होती तो मैं उस के सामने चुन्नी नहीं औढ़ती थी जिस से मेरे भारी चूचियों के दर्शन उस को हो जाएँ और जब वह मुझे पीछे  से देख रहा हो तो मैं अपने चूतड़ मटका मटका कर चलती 

हमारे घर मैं नीचे की मंज़िल मैं एक ड्राइंग रूम, एक बेड रूम और एक किचन और बाथरूम थे. इस के इलावा दूसरी मंज़िल मैं दो कमरे और एक बाथरूम था उन मैं से एक मैं मैं सोती थी और दूसरा नीरज को दे दिया गया यह दोनों कमरे बाथरूम से भी जुड़े हुए थे और बहार से एक बालकनी से भी नीचे से आने वाली सीढीयां नीरज वाले कमरे मैं जाती थी मेरा कमरा पीछे था इस तरह हम दोनों को पूरी आज़ादी मिल सकती थी 

तीन दिन नीरज को ऐसे भड़का देने के बाद मैं ने उस को कहा मैं स्टेटिस्टिक्स मैं कमज़ोर हूँ और वह मुझे स्टॅटिस्क्स पढ़ा दे नीरज उस के लिए मान गया मगर मेरा इरादा तो कुछ और ही था शाम से पहले ही मैं ने अपने शरीर को नीरज के लिए पूरी तरह तैयार किया. मैं अच्छे से नहाई चूत और बाजुओं के नीचे के बाल साफ़ किया और एक अच्छा सा स्प्रे लगाया फिर एक टाइट सी ड्रेस पहन कर नीरज के कमरे मैं  किताबें ले कर आ गयी दीदी काम खत्म कर पड़ोसन से गप्पें लगा रही थी 

नीरज और मैं टेबल पर बैठ गए मेरे मोम्मे ड्रेस फाड़ कर बहार आने की कोशिश मैं थे 

नीरज ने पढ़ाना शुरू किया पर मेरे ध्यान पढ़ाई मैं कैसे लगता ? यह मेरी ज़िंदगी का सब से बड़ा इम्तेहान था मैं ने  डरते डरते अपना एक पैर उस के पैर से रगड़ा  " हे भगवान क्या होगा ? यह सोच कर मेरे कान लाल हुए जा रहे थे "

नीरज ने मुझे देखा और मुस्कुरा दिया और फिर अपना हाथ मेरी जाँघों पर फिराने लगा "वाह से भगवान तुम महान हो आज मेरे लिए भी चुदाई का एक पक्का इंतज़ाम कर दिया" मैं ने मन ही मन सोचा और नीरज को आगे बढ़ने के लिए अपनी जांघें थोड़ी फैला दी फिर उस का हाथ ऊपर जाते जाते मेरी चूत के ऊपर आ गया कपड़ों के अंदर मेरी चूत रस बहाये जा रही थी 


फिर नीरज ने मुझे अपनी बाहों मैं भर लिया और उठा कर बिस्तर पर पटक दिया और अगले क्षण वह मेरे ऊपर सवार था मैं ने भी उस के मुंह और छाती पर चुम्बन की बौछार लगा डाली फिर नीरज मेरे कपडे उतारता चला गया मैं ने पूरा सहयोग किया 

हम दोनों की साँसे तेज थी और मुंह से उम्म्म उम्म्म आअह आह निकल रही थी 

फिर नीरज ने अपनी जीभ मेरे मुंह मैं घुसा कर मुझे चूमा तब मुझे अंदाज़ हुआ वह चुदाई का पुराना खिलाड़ी है मेरी जीभ भी उस के मुंह को टटोलने लगी 

नीरज मेरी चूचों को देख कर मस्त हो गया वह उन्हें कभी कास के दबता कभी चूसता और कभी निप्पल को काट लेता मुझे इस सब मैं बड़ा मजा आ रहा था और मैं उस के मुंह और गर्दन पर चुम्बन पर चुम्बन दे रही थी और अपनी टाँगें फैला कर उस को आगे बढ़ने के लिए निमंत्रण दे रही थी 

फिर नीरज ने अपने हाथ मेरी पेंटी मैं घुसा दिया और चूत को अपनी हथेली मैं भर लिया 


उफ्फ्फ कितना मजा आ रहा था ,,,उस मर्द को अपना शरीर समर्पण कर देने का मन  कर रहा था 

मैं ने भी उस का लंड दबाना स्टार्ट कर दिया अब नीरज के मुंह से सस स्स्स्स स्स्स निकल रहा था 

"ओह्ह्ह सेक्सी"   नीरज ने तारीफ़ मैं पहले दो शब्द कहे 

"ओह डॉर्लिंग " मेरे मुंह से निकला 

"ओह रानो" यह मेरा नया नाम था 

"ओह राजा" कह कर मैं ने भी उस को अपना मान लिया 

जैसे ही हम पूरे नंगे हुए नीरज नीचे झुका और मेरी चूत के होंठों पर एक चुम्मा दे डाला 

"बड़ी मस्त खुशबू है" नीरज बोला और मैं ने सोचा चूत की  खुशबू भी मस्त हो सकती है क्या ? वहाँ तो पेशाब की बदबू होनी चाहिए मगर बाद मैं मुझे पता चला की अगर चूत को साफ़ रखा जाए तो उस मैं मर्द को मस्त कर देने वाली एक खुशबू होती है 

फिर तो नीरज एक मंझे हुए खिलाड़ी की तरह मेरी टांगों को फैला कर मेरी चूत  को चाटने लगा 

यह मेरे लिए ज्यादा हो गया और मेरे शरीर मैं भूचाल आ गया बाद मैं जब मैं सेक्स के बारे मैं सब जान गयी थी तब मुझे पता चला की मैं इतने मैं ही झड़ गयी थी 

मगर नीरज रुका नहीं और मेरी चूत  को प्यार मिलता रहा चूत  रस  बहाती रही और नीरज उस को पूरा चाट जा रहा था 


"हे भगवान अब कोई गड़बड़ न हो  आज मुझे औरत बन जाने दे" मैं ने मन ही मन इश्वर से प्रार्थना की 
शायद भगवान ने मेरी प्रार्थना सुन कर नीरज को उतावला कर ही दिया उस ने मेरी टांगें उठाई और मेरी चूत  के छेद  पर अपने लंड  को सटा दिया फिर मैं ने आँखें बंद कर ली 

अगले ही क्षण मेरी चूत  मैं ऐसा महसून हुआ जैसे किसी ने उस मैं चाकू घुसा दिया हो मुझे पता था पहली बार ऐसा होता है इस लिए मैं ने अपने होंठ बींच लिए 

"रानो पहली बार है क्या" नीरज ने पूछा 

मैं ने सर हाँ के लिए हिला दिया 

"ओह" 

फिर नीरज ने इतने आहिस्ता आहिस्ता अपने लण्ड  को आगे सरकाया की मुझे पता ही नहीं चला कब वह पूरा का पूरा मेरे अंदर था 

थोड़ी देर ऐसे ही रुक कर नीरज ने अपना मूसल वापिस खींचा और फिर धीरे से अंदर कुछ देर धीरे करने के बाद नीरज की चुदाई  बढे और मुझे भी मजा आने लगा अब मैं चुदाई मैं पूरा साथ दे रही थी 

उम्म्म आअह ओह डॉर्लिंग 

ओह्ह राजा मजा आ गया रे 

नीरज मेरी चूत  को पेले जा रहा था और मैं मस्ती से चुद रही थी 

उह्ह आअह के साथ अब फच फच की आवाजें भी कमरे मैं थी जिस से चुदाई का माहौल और मस्त हो गया था 

मेरे शरीर मैं फिर से हलचल होने लगी मैं दूसरी बार झड़ने की तरफ जा रही थी उधर नीरज भी जोश मैं था और उस  चूतड़ पकड़ कर थिोड़ा और उठाये और उन्द को अंदर तक घुसा कर पेला इस से मेरे झड़ने की शुरुआत हो गयी नीरज भी माल छोड़ने लगा और उस के माल ने मेरी चूत को भर दिया 

फिर हम निढाल हो कर एक दुसरे से चिपका गए हमारी साँसे अभी भी तेज थी 

इस तरह मेरी पहली चुदाई की तमन्ना पूरी हुयी नीरज ने मुझे बताया की कुंवारी चूत छोड़ने का उस का भी पहला अनुभव था 

उस रात हम ने एक बार और चुदाई की 

सुबह जब मैं उठने लगी तब फिर नीरज ने मुझे बिस्तर पर दबा लिया मगर मेरी चूत  दुःख रही थी लस लिए मैं मैं  कहा "जानू अभी मुझे आदत नहीं है ना" थोड़े दिन मैं जितनी बार कहोगे उतना। ... 
नीरज ने आँखें बंद कर के मुझे छोड़ दिया और मैं उस के नीचे से खून के दाग लगी चादर निकाल कर अपने कमरे मैं आ गयी 

कुछ दिन बाद ही गर्भ से बचने के लिए मैं ने कॉपर टी लगवा ली 
उस दिन के बाद हमारी अगले चार साल बेइंतहा सेक्स चली 

हम लोग मेरी माहवारी के दिनों भी सेक्स करने से नहीं रुक पाते थे इस लिए हम  ने गांड मारना स्टार्ट किया 

हम दोनों की चुदाई का थोड़ा अंदाज़ दीदी को भी हो गया था मगर वह चुप रही क्यों की उस को पता था मैं कितनी बड़ी चुद्दल हूँ और अगर नीरज मुझे चोद  कर ठंडा नहीं रखेगा तो मैं जरूर ही बाहर  जा कर चुदूँगी इस लिए उस ने हम दोनों को कभी कुछ नहीं कहा 

मेरी शादी से एक महीने पहले मैं ने कॉपर टी निकलवा दिया और नीरज के बच्चे को अपने पेट मैं आने दिया 

शादी मैं तो यह हालत थी की फेरे पर बैठने से पहले नीरज ने मुझे घाघरा उठा कर चोदा जब मैं फेरे ले रही थी तो मैं  पैंटी नहीं पहनी हुयी थी और  नीरज का वीर्य मेरी चूत  से निकल निकल कर मेरी टांगों पर बह   कर आ रहा था क्यों की उस से थोड़ी देर पहले ही हम दोनों ने ताबड़ तोड़ सेक्स किया था 

शादी के बाद  विदा हो कर मैं अपने पति के साथ ट्रैन से उन के शहर जा रही थी।  नीरज ने उसी ट्रैन की उसी डिब्बे मैं अपनी रिजर्वेशन करवा ली थी फिर हम ने ट्रैन के बाथरूम मैं एक जबरदस्त सेक्स किया 

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