Friday, May 13, 2016

रिश्ते सिर्फ़ चुदाई के

रिश्ते सिर्फ़ चुदाई के

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 माँ बाप के अचानक गुजर जाने के बाद मुझे मेरी चाची ने ही पाला. वैसे तो चाची विधवा थी पर विधवा का एक भी गुण उन मैं नहीं था, वह बहुत ही मस्त मस्त औरत हैं, हमेशा मजाक और ज्यादातर गन्दे वाले मजाक  आदत है शादियों के समय तो चाची की मस्ती और ही बढ़ जाती थी  रात को मैं चाची के साथ ही सोता था

जब मैं नौंवीं क्लास मैं था तब एक रात मैं ने अपने पजामे के नाड़े के पास चाची की उंगलिओं को महसूस किया मुझे लगा चाची उस को खोलना चाहती हैं मैं शांत पड़ा रहा मेरा दिल बहुत जोर से धड़क रहा था और मुझे यह सब बहुत अच्छा लगा रहा था चाची ने धीरे से पाजामा खोल और मेरा कच्छा नीचे कर के मेरे लण्ड को सहलाने लगी उफ़ क्या मस्ती थी चाची की नरम नरम उगलियाँ मेरे लण्ड को पकड़ कर ऊपर नीचे कर रही थी और सुपारे को दबा रही थी थोड़ी देर ऐसे ही मस्त मस्त रगड़ाई के बाद चाची ने मेरे लण्ड  को अपनी जाँघों से सटा लिया, उन की जाँघों की नरम नरम मखमल सी खाल पर रगड़ खाने से लण्ड  की मस्ती और ज्यादा बढ़ गयी और थोड़ी देर में लण्ड से पानी जैसा चिपचिपा कुछ निकला और वह ढीला हो गया फिर चाची ने भी अपनी जांघें पोंछ कर साफ़ की सो गयीं

दिन मैं हम ने इस बारे मैं कोई बात नहीं की।  मुझे रात का इंतज़ार था,   यह सब बात ऐसी थी की मैं इस बारे मैं अपने किसी दोस्त से भी बात नहीं कर सकता था अगली रात फिर उसी तरह चाची ने मेरा पाजामा खोला और लण्ड  निकाल कर उस को मलने लगीं। जब वह पूरा तन गया तब उन्होंने मेरी तरफ पीठ कर दी और उन का का पेटीकोट ऊपर तक उठा हुआ था इस लिए मेरे तना हु लण्ड  अब उन के चूतड़ों पर रगड़ खा रहा था अब मुझे कल से ज्यादा मजा आ रहा था मैं ने चाची को कमर से पकड़ लिया और अपना लण्ड उन के  नरम नरम चूतड़ों पर घिसता रहा फिर थोड़ी देर बाद वही हुआ मेरे लण्ड से पानी निकला और चाची के चूतड़ों पर फेल गया चाची ने उस को साफ़ किया और सो गयीं

अगले दिन मैं सारे दिन सोचता रहा चाची क्या कर रही हैं ? क्या यह मर्द औरत वाली चुदाई है ? मेरे लण्ड से जो पानी निकलता है क्या उस से चाची को बच्चा हो जाएगा ? वगैरह वगैरह। .. अगली रात बात और आगे बढ़ गयी मेरा पाजामा खोल कर चाची ने मेरे लण्ड को उसी तरह मॉल कर खड़ा किया उस ने बाद चाची मेरे ऊपर आ गयीं और मेरे लण्ड को पकड़ कर अपनी जाँघों के बीच लिया मुझे लगा वह उन के छेद मैं घुस गया उस वक़्त मैं ने सोचा वह उन की गांड वाले छेद मैं चला गया है पर मुझे बहुत मजा आ रहा था और ऐसा लग रहा था चाची को भी मजा आ रहा था काफी देर चाची मेरे लण्ड को अपने छेद मैं ले कर ऊपर नीचे होती रही और फिर मेरा पानी निकल गया इस बार सारा का सारा पानी चाची के छेद मैं समां गया था

 इस सब के बाद मैं ने अपनी क्लास के कुछ लड़कों से जिन को गन्दी बातों के बारे मैं ज्यादा पता था बात करने की कोशिश की,  उस से मुझे यह तो पता चल गया की यह सेक्स ही थी और यह भी पता चला की चुदाई गाड़ से नहीं चूत मैं होती है  मैं ने तब तक किसी भी बड़ी औरत की चूत  देखी तो थी नहीं और मैं चूत  का मतलब छोटी बच्ची जैसी सोचता था इस लिए मुझे आश्चर्य भी हुआ की इतना मोटा लण्ड  छोटे से छेद  मैं कैसे जा सकता है

फिर यह रोज़ रात का किस्सा बन गया चाची मुझे नंगा करती और मेरे ऊपर आ कर मस्त चुदाई करती फिर हम दोनों झड़ जाते और सो जाते दिन मैं हमारे बीच इस बात पर कोई बात नहीं होती थी मगर मुझे चाची बहुत प्यारी लगनी लगी और मैं दिन भर उन के बारे मैं ही सोचता और रात होने का इंतज़ार करता

 करीब बीस दिन बाद की एक रात चाची के बदन मैं कोई हरकत नहीं थी और मेरा लण्ड उन की चूत मैं घुसने के लिए बेक़रार था और चाची कुछ कर ही नहीं रहीं थी आखिर मैं ने ही चाची को अपनी तरफ खींचा और उन की सारी और पेटीकोट उठाने लगा पर न्होंने मेरा हाथ हटा दिया मैं ने जब फिर से खींचा तब उन्होंने मेरे कान के पास आ कर बोला “कपडे पर हूँ

 मुझे पता नहीं था यह क्या होता है पर मैं जान गया उन को कोई दिक्कत तो जरूर है इस लिए और कुछ नहीं किया और सो गया अगले दिन मैं ने अपने उन्ही दोस्तों से पूछा की यह "कपडे पर होना क्या होता है ?

वह सब हंस पड़े फिर मुझे बताया की हर जवान औरत की चूत मैं से हर महीने तीन चार दिन खून आता है जिस की वजह से वह चूत पर कपडा लगा कर रखती हैं।  मैं तो आश्चर्य मैं आ गया मुझे तो यह सब पता ही नहीं था तो क्या चाची की चूत मैं से भी खून आ रहा है ?

 अगले दिन मैं चाची पर ज्यादा नज़र रखने लगा क्या सचमुच उन के साथ वही हो रहा है जो लड़के कह रहे थे ? वैसे उन को कोई दर्द वगैरह तो नहीं था एक बात जो मैं ने देखी वह यह थी की उन्होंने शाम को पूजा नहीं  की फिर मैं ने देखा की नहाने जाते समय कुछ पुराने कपडे अपने साथ ले गयीं थी और बाथरूम की खिड़की के पीछे कुछ ऐसे ही कपडे लिपटे हुए रखे थे मैं ने उन मैं से एक को उठाया और खोल कर देखा तो उस मैं सचमुच खून के निशान थे इस का मतलन चाची को भी वही हो रहा है जो उन लड़कों ने बताया था और यह हर जवान लड़की को हर महीने होता है यह सब सोच सोच कर मेरा लण्ड तन गया और मैं बिस्तर पर लेट कर अपना लण्ड रगड़ने लगा जब खूब देर लण्ड को रगड़ा तब उस मैं से वही पानी निकला ओर मैं शांत हो गया

 क्यों की हर बात मैं अपने दोस्तों से नहीं पूछ सकता था इस लिए उसी दिन बाजार जा कर एक गन्दी निताब ले आया जिस का नाम था “गुप्त ज्ञान” शाम तक मैं ने छत पर जा कर उस किताब को पूरा पढ़ा उस किताब मैं सेक्स के बार मैं बहुत कुछ लिखा था और कई फोटो भी थे लण्ड और चूत की कैसी कैसी बनावट होती है, चुदाई कैसे की जाती है, बच्चे कैसे होते हैं वगैरह वगरह अब यह साफ़ हो गया चाची मेरे साथ साथ चुदाई करने लगी थी किताब पढ़ते पढ़ते मैं अपने लण्ड को रगड़ रहा था जिस से मैं दो बार पानी निकाल चुका था पर फिर भी वह शांत नहीं हो रहा था उस दिन मैं ने अपने लण्ड को रगड़ रगड़ कर तीन बार पानी निकाल था पर वह शांत ही नहीं हो रहा था और मैं अपनी गुप्त ज्ञान वाली किताब मैं यह भी पढ़ चूका था की इस तरह पानी निकालने को हस्त मैथुन कहते हैं और ज्यादा हस्त मैथुन करने से जवान लड़कों को कमज़ोरी भी आ जाती है यह सोच सोच कर मैं तनाव मैं था मगर मुझ से रुका ही नहीं जा रहा था

 तीसरे दिन मुझे यह देखने की इच्छा हुयी की क्या चाची की चूत भी वैसी ही थी जैसी किताब मैं लिखी थी  ? और मुझे चाची के बदन को पूरा देखना था इस लिए जैसे ही वह नहाने गयी मैं बाथ रूम के दरवाजे के पास चला गया घर पुराना होने की वजह से बाथरूम के दरवाजे मैं कई छेद थे मैं ने उन मैं से एक छेद पर अपनी एक आँख टिका दी उफ्फ्फ क्या नज़ारा था ? चाची अपना ब्लाऊज़ और ब्रा उतार चुकी थीं और उन के मस्त मस्त मोम्मे मेरे सामने थे उन के निप्पल गहरे काले रंग के थे और खूब बड़े बड़े थे चाची का नंगा बदन देख कर मेरी साँसे तेज चलने लगी और लण्ड फिर तन गया फिर चाची ने अपना पेटीकोट खोला आज उन्होंने मेरा ही एक कच्छा भी पहना हुआ था तब उन्होंने कच्छा उतार तब मैं ने देखा की उनकी चूत पर एक कपडा लगा हुआ है और उस कपडे को जगह पर लगाए रखने के लिए चाची ने अपनी कमर के चारों तरफ एक नाडा बाँधा हुआ है और कपडे के दो किनारे उस मैं फंसा रखे हैं फिर उन्होंने अपनी कमर के चारों तरफ लिपटा हुआ फीता भी खोल दिया और चूत पर लगा कपडा हटा दिया उस पर खून का धब्बा बना हुआ था यह देख कर मुझे विश्वास हो गया की खून थोड़ा थोड़ा ही आता है बहुत ज्यादा नहीं और इस सब मैं मेरी प्यारी प्यारी चाची को दर्द भी नहें झेलना पड़ता फिर चाची नहाने लगी बड़ा ही मस्त नज़ारा था मैं ज़िंदगी मैं पहली बार औरत का नंगा बदन देख रहा था चाची ने मल मल कर नहाया, अपनी चूत  को अच्छी तरह साफ़ किया और फिर तौलिया ले कर बदन को सुखाया इस बीच मुझे उन के बदन के अच्छे से दर्शन हुए।  उन की चूत झांटों से ढकी हुयी थी और जब वह नहा कर उठीं तो पानी की एक दो बूँदें उन की झांटों से लटक रही थी झांटों के बीच वह छेद  भी थोड़ा थोड़ा दिख रहा था जहां लण्ड घुसा कर चाची ने मुझे मर्दों वाला सुख दिया था

 बदन सुखाने के कपडे पहने आज चाची ने कपडा नहीं लगाया और कच्छा भी नहीं पहना जब वह नहा कर बाहर आईं और कपडे सुखा रही थीं तब उन्होंने मुस्कुरा कर मुझे कहा “बस आज पूरा हो गया”

 मैं समझ गया वह किस बात को पूरा होने कह रहीं है और यह बात साफ़ थी की आज रात वह फिर मेरे साथ सेक्स करेंगी रात के इंतज़ार मैं मैं शायद पागल सा हो गया था शाम को चाची ने बड़े प्यार से कहना खिलाया और हम बिस्तर पर आ गए अब सोने का नाटक करने की हम दोनों को जरूरत नहीं लग रही तयहे इस लिए हम दोनों एक दुसरे से चिपट गए और किसी भी मर्द और औरत की तरह सेक्स मैं आगे बढ़ते गए, इन दिनों पढ़ी हुयी गन्दी किताबों से प्राप्त ज्ञान का प्रयोग करते हुए मैं चाची के अंगों से खेल रहा था जिस से हम दोनों की मस्ती सातवें आसमान अपर थी चाची भी आज एक दूसरी ही औरत लग रही थी और भूखी शेरनी की तरह मेरे शारीर को नोच खसोट यही ही उस रात तो हम पूरी रात यही करते रहे और पांच बार एक दुसरे के शारीर को पूरी तरह भोगा सुबह जब मैं उठा तब मुझे लगा अब मैं लड़का नहीं रहा मर्द बन गया हूँ और उस दिन से मैं अपनी चाची का मर्द बन गया

 मेरे कहने पर चाची ने अपने पूरे बदन को मुझे देखने दिया इस काम के लिए वह पूरी नंगी हो कर मेरे सामने लेट गयीं और मैं ने किताब ले कर उन की चूत गांड का एक एक हिस्सा छू छू कर देखा इस तरह उनकी चूत  के दाने और दोनों छेदों का पूरा पता चल गया  (उस से पहले मैं सोचता था की वहाँ एक ही छेद  होता है सिर्फ़ मूतने के लिए ) मैं ने उन के छेदों को कई बार चूमा और चाटा किताब और चाची की मदद से मैं ने उन के जी स्पॉट का भी पता लगाया और जब उस को रगड़ रगड़ा कर मजा दिया तब चाची इतना शोर मचा कर झड़ी की मुझे डर  लगने लगा की कोई सुन न ले


ऐसे ही चुदाई करते और मस्ती करते २५ दिन बीत गए और चाची की माहवारी के दिन फिर आ गए अब मुझ से रहा नहीं जा रहा था इस लिए एक दिन हम ने खून से बाहरी चूत मैं लण्ड घुसा दिया और सेक्स की मगर गीले पण की वजह से मजा नहीं आया अगले दिन मुझे परेशान देख कर मेरी प्यारी चाची ने मुझे अपनी गांड गिफ्ट मैं दे दी उस रात उन्होंने मेरे लण्ड को अपनी गांड मैं लिया इस मैं हम दोनों को बहुत मजा आया उस के बाद मुझे कभी भी चाची की माहवआरी के दिनों मैं बिना चुदाई के नहीं रहना पड़ा, चाची मेरा लण्ड  अपनी गांड मैं ले कर मुझे मजे देती और खुद भी मजे लेती जब मैं ने बच्चें होने की बात की तो चाची ने बताया की उन की बच्चेदानी मैं कुछ दिक्कत है और जब तक ठीक न हो बच्चा नहीं हो सकता इस तरह हम निश्चिन्त हो सेक्स करते रहे


 इस तरह चुदाई के दिन और चुदाई की रातों के बीच दो साल बीत गए. अब मुझे आगे की पढ़ाई के लिए गाँव से शहर जाना था सोच कर दिल बहुत उदास था की अब चाची की मस्त चूत नहीं मिलेगी एक दिन चाची ने पूछ ही लिया “क्या बात है आज कल चुप चुप रहने लगे हो ?

 जब मैं कारण बताया तो चाची हंस कर बोली, "बस इतनी सी बात, कानपूर मैं मेरी छोटी बहिन सुमन भी पढ़ रही है, वह एक कमरा ले कर रहती है तुम उस के साथ रह सकते हो अब वह भी जवान हो गयी हैं चूत मैं आग तो लगी ही होगी क्यों की वह हर मामले मैं मेरे जैसी है और मैं उस को समझा दूंगी। और मैं भी कभी कभी उस के पास आ जया करूंगी " ये बात सुन कर मैं बहुत खुश हुआ और उसी वक्त चाची को पकड़ कर एक बार चोद डाला


 जिस दिन मुझे शहर आना था उस दिन सुबह सात बजे तक हम दोनों ने चुदाई करी और फिर बस से कानपुर आ गया वहाँ जो भी हुआ वह पूरा न बता कर बस इतना ही बताऊंगा की उसी दिन दोपहर दो बजे मेरा लण्ड सुमन की कुंवारी चूत मैं फंसा हुआ था और उस की मस्त टाँगे मेरी कमर के चारों तरफ लिपटी हुयी थी हम दोनों के बदन पर एक भी कपडा नहीं था सब कपडे कमरे मैं इधर उधर बिखरे हुए थे

 सुमन के साथ लगातार तीन साल ऐसे ही बीत गए इस बीच हम पूरे तरह पाती और पत्नी की तरह रहे एक दो मामले को छोड़ कर वह सच मैं अपनी बहन जैसी थी वही भारी भारी चूचियाँ, पतली कमर और सेक्सी चूतड़। उस को भी हमेशा चुदाई की जरूरत रहती थी फरक इतना था की सुमन इस तरह चुदाई करने से बिन ब्याही मान बन सकती थी इस लिए हम दोनों ने उस की चूत मैं कॉपर टी डलवा दी और निश्चिन्त हो गए बीच बीच मैं कभी कभी चाची हमारे पास आ जाती थी और कभी हम गांव चले जाते थे

इस बीच हम दोनों ने एक दुसरे के साथ वह सब कुछ किया जो एक माध और औरत की बीच संभव है।  सुमन की सहायता से हम ने हर पोजीशन मैं सेक्स किया, एक दुसरे को मूत्र स्नान करवाया, हनीमून कपल की तरह शिमला मनाली घूमने गए, पार्क मैं , झादिओं मैं सभी जगह सेक्स की 


 पढ़ाई के बाद हम दोनों नौकरी करने लगे अब सुमन के घर से बराबर उस की शादी के लिए रिश्ते आने लगे. पहले तो वह उन्हें टाल देती रही मगर धीरे धीरे दवाब बढ़ता जा रहा था

इधर मेरे ऑफिस मैं एक लड़की थी - नीतू।  बड़ी प्यारी सी थी।  हम दोनों एक दुसरे को पसंद करते थे और खूब बातें भी करते थे धीरे धीरे यह बातें ख़ास व्यक्तिगत बातों पर भी आ गयी नीतू मेरी हर बात का सही जवाब देती और कभी बुरा नहें मानते थी जब मैं ने उस से बहुत बहुत पूछा की वह शादी क्यों नहीं करती तब उस ने साफ़ साफ़ बता दिया की उस के मम्मी पापा के अचानक एक्सीडेंट मैं गुजर जाने के बाद से वह अपने भाई से पूरी तरह जुडी हुयी आई और वह दोनों रेगुलर सेक्स भी करते हैं उन दोनों भाई बहन ने यह भी तय किया है की वह इस रिश्ते को ज़िदंगी भर निभाएंगे इस लिए वो दोनों शादी के लिए सोचते ही नहीं

 उस की इतनी ईमानदारी देख कर मैं भी भी उस को अपने और सुमन के बारे मैं सब कुछ बताया और फिर उस को बोला की अगर वह और उस का भाई चाहे तो मैं उस से शादी कर लूँगा और उस का भाई सुमन से शादी कर ले इस तरह दोनों की शादी भी हो जाएगी और जो सेक्स के रिश्ते हम दोनों ने बना रखे है वह जैसे चल रहे  हैं वैसे ही चल सकते है हैं नीतू ने अपने भाई से इस बारे मैं बात की और वह इस के लिए मान गया, मगर उस की एक शर्त थी की मैं नीतू का पति होते हुए भी उस को कभी भी नहीं चोदूँगा मैं ने यह बात मान ली पर अपनी तरफ से सुमन के लिए ऐसी कोई शर्त नहीं लगाई

 दोनों शादियां एक ही दिन हुयी, सुमन के मम्मी पापा दुबई से आये और हमारे सुहाग रात के कमरे एक ही होटल मैं थे , रात को दोनों जोड़े अपने अपने पार्टनर के पास चले गए और शादी के बाद की पहली रात मस्त मस्त चुदाई करते हुए बिताई. सुमन और मैं ने पांच बार सेक्स की

 फिर हम लोग एक बड़े घर मैं आ गए इस मैं तीन बेड रूम थे एक मेरे और सुमन के लिए और एक मैं नीतू और विजय और एक चाची के आने जाने के लिए इस घर मैं पूरी मस्ती रहती थी कोई किसी से शर्म नहीं करता था और घर के अंदर ज्यादा कपडे नहीं पहने जाते थे सेक्स का खेल कभी भी चलता रहता था

नीतू के साथ भी वही दिक्कत थी, माहवारी के दिनों वह सेक्स नहीं करती थी और विजय को पांच दिन बिना सेक्स के रहना पड़ता था  एक बार जब नीतू की माहवारी चल रही थी तब घर मैं चाची आयी हुयी थी रात को खाना खाने के बाद सभी ने थोड़ी देर टी वी देखा फिर सोने चले गए मगर विजय डाइनिंग टेबल पर बैठ कर लैप टॉप मैं कुछ देख रहा था तभी चाची वहाँ से निकली।  विजय लैप टॉप की स्क्रीन देख कर अपने बरमूडा मैं अपने लण्ड को सहला रहा था चाची समझ गयी और उन्होंने मजाक करते हुए कहा “क्या बेटा ? “ इंटरनेट की सुंदरियों से काम चला रहे हो ?

 “चाची नीतू को लाल झंडी लगी हुयी है न “ विजय ने जवाब दिया

 अरे रे। ..तो क्या हुआ ? हम ने तो हरी झंडी दी हुयी है “ कह कर चाची ने मजाक किया और विजय की जाँघों पर हाथ फिराते  हुए लण्ड की तरफ बढ़ाने लगी चाची के बड़े बड़े मोममे उन के ब्लाउज़ से निकले पड़ रहे थे और अब विजय के मुंह के पास थे विजय ने भी चाची के चूतड़ सहलाने शुरू कर दिए चाची इतनी शोर शोर से मजाक और उह आह  कर रही थीं की हम सब उठ कर डाइनिंग रूम मैं आगए थोड़ी देर मैं नीतू भी वहाँ थी जो कुछ हो रहा था सब उस का मज़ा ले रहे थे धीरे धीरे चाची और विजय एक दुसरे से पूरी तरह लिपट गए और कपडे उतार डाले, नीतू भी मस्ती ले रही थी

 फिर सोफे पर ही चाची नीचे थी और उन की टाँगे पूरी तरह फ़ैली हुयी थी विजय ने अपना लण्ड चाची की चूत   मैं उतार दिया विजय मस्त हो कर धक्के लगा रहा था और चाची के भारी अभरी मम्मे से खेल रहा था चाची भी चूतड़ उचका उचका कर मजे ले रही थी मुश्किल से दस धक्के लगाए होंगे की विजय झड़ गया और माल चाची की चूत  मैं गिर दिया इतनी जल्दी झड़ जाने की वजह से विजय ने चाची को सॉरी बोला तो चाची पूरे माजक से मूड मैं थी ही और बोली “ कोई बात नहीं बीटा - रमा की भटठी है ही इतनी गरम की लोहा जल्दी गल जता है


 यह सुनते ही हम सब हँस  पड़े और फिर अपने अपने  कमरे मैं आ गए थोड़ी देर मैं चाची मेरी बगल मैं थी और बोली “उस ने तो गीला कर के छोड़ दिया, तू ही ठंडी कर अब” फिर हम दोनों ने एक घमासान चुदाई हुयी , सुमन बगल मैं लेटी इस सब के मजे ले रही थी अगले दिन चाची ने अपनी काम कला का पूरा प्रयोग करते हुए विजय को मस्त मस्त चोदा। चाची विजय के ऊपर रहीं और जैसे ही विजय झड़ने को होता चाची या तो चुदाई रोक देती या धक्के बहुत छोटे कर देती. विजय आँख बंद करके चाची के मम्मे दबा दबा कर मजे ले रहा था दोनोंपूरी तरह तृप्त होने तक लगे रहे फिर विजय पूरी तरह खुश था चाची तो कुछ दिन बाद गॉंव वापिस चली गयी और अगले महीने नीतू की माहवारी के समय विजय फिर अकेला था और दो ही दिनों मैं बावला सा हो रहा था नीतू परेशान थी की क्या किया जाए तब मैं ने कहाँ अगर उस को कोई आपत्ति न हो तो सुमन उस को ठंडा कर सकती है , नीतू इस बात के लिए राजी हो गयी और तीन दिन सुमन ने विजय को अपने शरीर की मस्ती दी , ससेक्स मैं सुमन अपनी बहन जैसी ही थी इस लिए विजय को पूरा मस्त कर देती थी


 फिर ऐसा बार बार होने लगा. नीतू की माहवारी के दिनों मैं सुमन विजय और मेरे दोनों के साथ चुदाई करती सुमन और चाची दोनों ने मुझे बताया की विजय का लण्ड काफी पतला है और उस के साथ सेक्स मैं किसी साधारण औरत को पूरा मजा आना मुश्किल है उधर विजय को सुमन और चाची के सेक्सी शारीर छोड़ने को मिलने लगे तो उस ने नीतू पर ध्यान देना कम कर दिया वह बात बात मैं नीतू को ताने देता की वह ठण्डी हो गयी है और सेक्स मैं मजे देना सीखना हो तो सुमन या चाची से सीखे नीतू ने काफी कोशिश की की वह विजय को पूरा खुश करे पर विजय उस को छोड़ते वक़्त चाची या सुमन को ध्यान मैं लाने लगा था इस सब से नीतू परेशन रहने लगी और काम गड़बड़ होने लगा एक दिन ऑफिस से वापिस आते वक़्त मैं उस को ले कर एक पार्क मैं बैठा और बड़े पयार से सभी बातें की नीतू ने बताया की विजय अब उस को ठीक से प्यार भी नहीं कर रहा है और सेक्स मैं विजय का ध्यान कहीं और ही रहता है और इस वजह से नीतू सेक्स का पूरा मजा नहीं मिल पा रहा
यह सुन कर मैं ने तय कर लिया की मैं नीतू को इस तरह नहीं देख सकता और और ही नीरू की इच्छाओं को पूरा करना होगा कुछ दिनों बाद मैं ने ऑफिस की तरफ से ऐसा टूर बनाया जिस मैं नीरू को भी मेरे साथ जाना था

हम लोग सुबह की फ्लाइट से बम्बई आ गए और एक रात रुक कर अगले दिन वापिस जाना था ऑफिस की मीटिंग बहुत शानदार रही और सभी ने हमारे काम की बहुत तारीफ़ की. शाम को नीरू काफी खुश थी और हम बहुत देर जुहू बीच पर घुमते रहे फिर बहार ही खान खाया कंपनी के गेस्ट हाउस आते आते देर हो चुकी थी जब मैं अपने कमरे की तरफ जाने लगा तो नीतू मेरे साथ ही आ गयी और हम बिस्तर पर बैठ कर फिर गप्पे लगाने लगे पुराणी बातें याद कर के नीतू की आँखों मैं आंसू आ गए और मैं उस को सहलाने लगा धीरे धीरे हम दोनों एक दुसरे के और पास आते गए और जल्दी हेी हम दोनों ने एक दुसरे को नंगा कर डाला था नीतू का शरीर सुमन और चाची से एक दम अलग था, सुमन और चाची के बदन बदन गदराए हुए थे बड़े बड़े पपीते जैसे मम्मे, भारी गांड। दोनों अपने चूत को एक दम सफाचट साफ़ रखती थी , दोनों की चूत के होंठ मोठे और ब्राउन रंग के थे दूसरी तरफ नीतू की गोल गोल छोटी चूचियाँ थी, निप्पल काफी छोटा था कमर पतली और नीचे थोड़े से बुरे बालों के बीच गुलाबी चूत नीतू मस्ती से आँखें बंद कर ली थी मैं ने उस को पकड़ कर बिस्तर पर लिटा दिया वह पूरी सहयोग कर रही थी उस की गरम साँसे मुझे आगे बढ़ने का इशारा कर रही थी और वह मेरे गाल, कान होंठ अपर चुम्मा दिए जा रही थी मैं पतले कमर, गोल गोल चूचियों के मजे ले रहा था फिर मैं ने उस की टाँगे उठायी और उस के चूतड़ों के नीचे तकिया लगा दिया जिस से उस की चूत ऊपर आ जाए सुमन औरचाची के चूतड़ भारी होनेकी वजह से उन के साथ सेक्स करने मैं चूतड़ों के नीचे तकिया नहीं लगाना पड़ता था पर नीतू अलग थी पहली बार तो मैं ने नीतू की मस्त गुलाबी चूत चाट चाट कर उस को सेक्स का पूरा मजा दिया उस के बाद मैं ने अपना लण्ड उस की चूत मैं उतार दिया, साफ़ था नीतू को थोड़ा दर्द हो रहा था मगर वह मुझे अपने साथ भींचे हुयी थी अगले बीस मिनट मैं ने नीतू को कस के चोदा और वह दुसरे बार झड़ी इस बार जब वह झड़ रही थी तो उस ने बेड की चादर कस के पकड़ ली और उस का शरीर पूरी तरह अकड़ गया था उस रात हम दोनों ने एक बार और चुदाई फिर फ्लाइट पकड़ने के लिए सुबह बजे फ्लाइट पकड़ने के लिए निकल गए एयरपोर्ट के रसस्ते मैं नीतू मेरे कंधे पर सर रखे हुयी थी और उस के चेहरे पर एक अजीब सी संतुष्टी थी


 दिली आ कर अपनी चुदाई की बात नीतू ने अपने भाई विजय को नहीं बताई मगर मैं ने सुमन को बता दिया की बम्बई मैं हम दोनों ने सेक्स की थी सुमन इस बात से बहुत खुश हुयी और नीतू के माथे पर चूम डाला उस दिन के बाद हम और नीतू कोई न कोई बहाना बना कर समय निकाल लेते और सेक्स करते जल्दी ही नीतू प्रेग्नेंट हो गयी उस को पूरा विश्वास था की उस के पेट मैं मेरा बच्चा था प्रेजन्ट होने के बाद नीतू और विजय की सेक्स और काम हो गयी अब नीतू को कोई तनाव नहीं था फिर हमें चाची को बुला लेना पड़ा क्यूंकि नीतू और विजय दोनों का ध्यान वही रख सकती थी अब विजय और चाची रोज़ सेक्स करते और ज्यादा तर विजय चाची को अधूरा छोड़ कर उन की चूत मैं पानी गिरा कर सो जाता फिर हम चारों का सेक्स का प्रोग्राम चलता सुमन, चाची और नीतू तीनो मेरे साथ चुदाई करती हमारी सेक्स तब भी चलती रही जब नीतू का पेट काफी बढ़ गया था नीतू टाँगे फैला कर लेट जाती और मैं बीच मैं आ कर बड़ी धीरे धीरे उस को चोदता जिस दिन सुबह उस को हसपताल ले जाना पड़ा उस से पहली रात भी नीतू ने मेरे साथ सेक्स की नीतू को प्यार सा गोल मटोल बीटा हुआ


 सुमन की एक भाभी को शादी के साल बाद कोई बच्चा नहीं था सभी जांच हुए मगर कुछ पता नहीं चल पा रहा था क्या दिक्कत क्या है ? सुमन ने अपने भाई भाभी को इस बात के लिए राजी किया की वह शहर मैं इलाज़ करवाए जब यह लोग हमारे घर रहे तब उन्होंने एक दिन मान लिया कि सुमन के भैया को गांड मरवाने का हे शौक है और उस को औरतों मैं कोई दिलचस्पी नहीं है इस वजह से उन के बीच आज तक कभी भी सेक्स नहें हुआ बच्चा होना तो दूर की बात थी और वह समाज की बदनामी की वजह से ऐसा बता नहीं रहे थे फिर सुमन ने अपने भाई को इस बात के राजी कर लिया की वह भाभी को मुझ से चुदवा ले जिस से बच्चा ठहर जाए इस के बाद सुमन के भैया वापिस चले गए तब दोनों बहनों ने (सुमन और चाची ) ने अपना सच भी भाभी को बता दिया भाभी इस सब से बहुत खुश थी उसी रात सुमन की भाभी की असली सुहाग रात मनाई गयी मेरा कमरा फूलों से सजाया गया और सुमन की भाभी शादी के जोड़े मैं पूरा श्रीगां कर के बैठी थी मैं ने उस को धीरे धीरे निरवस्त्र किया वह नयी नवेली दुल्हन की तरह शर्माती रहे मेरे अनुभवी हाथों से उस का शरीर गरम होता चला गया और आखिर उस ने मस्त हो कर अपनी चूत को मेरा लण्ड लेने के लिए फैला दिया जब मेरे सुपारे ने उस की झिली को पार किया तब वह दर्द के मारे अपनी आँखें बंद किये हुयी थी और उस की चूत से बहता हुआ खून चादर पर गोल निशाँ बना गया सुबह सुमन ने वह चादर लपेट कर भाभी को गिफ्ट मैं दे दी 

सुमन की भाभी बहुत ही खुश थी सुमन ने अपनी भाभी को इतना कुछ समझा दिया की वह जल्दी ही सेक्स की एक्सपर्ट खिलाड़ी बन गयी अगले महीने मैं चार चार औरतों को चोद रहा था एक महीने बाद सुमन के भैया अपनी बीवी को लेने आये तब वह गर्भवती हो चुकी थी मगर हम सेक्स करते थे यह सब उन के सामने चलता था तभी एक अजीब बात हुयी सुमन के भैया ने रिक्वेस्ट की कि मैं उन की गांड मारूं मैं ने कभी मर्द की गांड नहें मारी थी मगर सुमन और चाची ने कहा यह भी कर के देख लो फिर मुझे उन की बात मान लेनी पडी रात को अपने कमरे मैं सभी औरतों के सामने मैं ने को नंगा किया और उस की गांड मैं उंगली दाल कर तेल से मालिश कर के गांड के छेड़ को ढीला किया और सब के सामने ही उस की गांड मैं अपना लण्ड घुस दिया साला मेरे मोठे लण्ड का खूब मजा ले रहा था तभी सभी ने एक अजीब बात देखी जब मैं उन की गांड मार रहा था तब उन का लण्ड पूरी तरह तन गया था चाची के इशारे से यह सब को दिखाया और सुमन की भाभी को चुदाई का इशारा किया जिस का मतलब था वह इस को अपनी चूत मैं ले ले सुमन की भाभी के फ़टाफ़ट अपने कपडे खोले और उस के तने हुए लण्ड को अपनी चूत मैं उतार लिया अब मैं सुमन के भाई की गांड मार रहा था और उस की भाभी अपने पति का का लण्ड अपनी चूत मैं लिए हुए थी ऐसा अगले दो तीन दिन फिर किया गया , धीर धीर यह पता चला की सुमन के भैया की गांड मैं कोई भी चीज़ घुसी हो तो लैंड खड़ा हो जाता है फिर हम ने सुमन के भाई की गांड मैं एक डिलडो घुसा दिया और थोड़ा रब करने से ही उस का लण्ड खड़ा हो गया और दोनों ने चुदाई की और दोनों को खूब मजा आया इस तरह सुमन की भाभी की चुदाई का पक्का इंतज़ाम हो गया और वह बहुत ही खुशी खुशी गाँव चले गए उन दोनों का दूसरा बच्चा अपना ही है उस के बाद मैं ने सुमन को भी गभवती धीरे धीरे विजय को भी इन सम्बन्धों का पता चल गया और वह भी इस खेल मैं मजे से शामिल होंइ लगा अब घर मैं कोई भी किसी के भी साथ कभी भी चुदाई कर सकता था और मजे ले सकता था हम सब के बीच बस एक ही रिश्ता था वह था चुदाई का