Thursday, December 12, 2013

mera bheteeja mera yaar


सब से पहले तो मैं आप लोगों को अपने शरीर के बारे मैं बता दूँ मेरा रंग थोड़ा सांवला है और हाइट काम है मगर मेरे मोम्मे और चूतड़ दोनों खूब भारी हैं और मेरी कमर पतली है इस तरह मेरा शरीर खूब सेक्सी है और मेरे मन भी सेक्सी की बातैं खूब चलती रहती हैं मुझे चुदाई का खूब शौक है और मैं अपनी चूत को खूब साफ़ रखती हूँ और वहाँ के बाल साफ़ कर के रखती हूँ 

यह कहानी मेरी पहली चुदाई की कहानी है जो मेरे और मेरे जीजा जी के बडे भाई के बेटे (न) के बीच हुयी मैं उस की चुदाई से इतनी मस्त हुयी की उस की पत्नी की तरह चार साल उस के साथ रही 

जैसे ही जवान हुयी मेरे अंदर चुदाई की इच्छा तेज होती जा रही थी वैसे तो मेरे जीजा ने मुझे एक दो बार कोने मैं घसीट कर मेरे मोम्मे दबाने की कोशिश की थी और अगर मैं चाहती तो वह मुझे चोद ही देते मगर मैं अपनी बहिन का घर ख़राब नहीं करना चाहती थी इस लिए मैं ने अपने जीजा को ऐसा कुछ नहीं करने दिया 

सेक्स के मेरे दो प्रयास  विफल रहे सेक्स के इरादे से दो बार मैं गली के लड़कों को इशारा करके अपने साथ लाई मगर बिस्तर पर आ कर मुझे नंगा देख उन के लंड से पिचकारी निकल गयी और उन्हें सॉरी बुल कर भाग जाना पड़ा इन सब से मेरी चुदाई के आग और भड़क रही थी 

फिर इन मेरे जीवन मैं नीरज आया वह मेरी बहिन के घर रह कर पढ़ाई करने गाओं से आया था, गाओं मैं उस की चाची उस से चुदती है यह हमें पता था इस लिए मैं उस से चुदने की पूरी उम्मीद मैं थी 

उस के आने के पहले दिन से ही मैं उस को अपनी और आकर्षित करने के लिए सभी हरकतें करने लगी जब दीदी आस पास न होती तो मैं उस के सामने चुन्नी नहीं औढ़ती थी जिस से मेरे भारी चूचियों के दर्शन उस को हो जाएँ और जब वह मुझे पीछे  से देख रहा हो तो मैं अपने चूतड़ मटका मटका कर चलती 

हमारे घर मैं नीचे की मंज़िल मैं एक ड्राइंग रूम, एक बेड रूम और एक किचन और बाथरूम थे. इस के इलावा दूसरी मंज़िल मैं दो कमरे और एक बाथरूम था उन मैं से एक मैं मैं सोती थी और दूसरा नीरज को दे दिया गया यह दोनों कमरे बाथरूम से भी जुड़े हुए थे और बहार से एक बालकनी से भी नीचे से आने वाली सीढीयां नीरज वाले कमरे मैं जाती थी मेरा कमरा पीछे था इस तरह हम दोनों को पूरी आज़ादी मिल सकती थी 

तीन दिन नीरज को ऐसे भड़का देने के बाद मैं ने उस को कहा मैं स्टेटिस्टिक्स मैं कमज़ोर हूँ और वह मुझे स्टॅटिस्क्स पढ़ा दे नीरज उस के लिए मान गया मगर मेरा इरादा तो कुछ और ही था शाम से पहले ही मैं ने अपने शरीर को नीरज के लिए पूरी तरह तैयार किया. मैं अच्छे से नहाई चूत और बाजुओं के नीचे के बाल साफ़ किया और एक अच्छा सा स्प्रे लगाया फिर एक टाइट सी ड्रेस पहन कर नीरज के कमरे मैं  किताबें ले कर आ गयी दीदी काम खत्म कर पड़ोसन से गप्पें लगा रही थी 

नीरज और मैं टेबल पर बैठ गए मेरे मोम्मे ड्रेस फाड़ कर बहार आने की कोशिश मैं थे 

नीरज ने पढ़ाना शुरू किया पर मेरे ध्यान पढ़ाई मैं कैसे लगता ? यह मेरी ज़िंदगी का सब से बड़ा इम्तेहान था मैं ने  डरते डरते अपना एक पैर उस के पैर से रगड़ा  " हे भगवान क्या होगा ? यह सोच कर मेरे कान लाल हुए जा रहे थे "

नीरज ने मुझे देखा और मुस्कुरा दिया और फिर अपना हाथ मेरी जाँघों पर फिराने लगा "वाह से भगवान तुम महान हो आज मेरे लिए भी चुदाई का एक पक्का इंतज़ाम कर दिया" मैं ने मन ही मन सोचा और नीरज को आगे बढ़ने के लिए अपनी जांघें थोड़ी फैला दी फिर उस का हाथ ऊपर जाते जाते मेरी चूत के ऊपर आ गया कपड़ों के अंदर मेरी चूत रस बहाये जा रही थी 


फिर नीरज ने मुझे अपनी बाहों मैं भर लिया और उठा कर बिस्तर पर पटक दिया और अगले क्षण वह मेरे ऊपर सवार था मैं ने भी उस के मुंह और छाती पर चुम्बन की बौछार लगा डाली फिर नीरज मेरे कपडे उतारता चला गया मैं ने पूरा सहयोग किया 

हम दोनों की साँसे तेज थी और मुंह से उम्म्म उम्म्म आअह आह निकल रही थी 

फिर नीरज ने अपनी जीभ मेरे मुंह मैं घुसा कर मुझे चूमा तब मुझे अंदाज़ हुआ वह चुदाई का पुराना खिलाड़ी है मेरी जीभ भी उस के मुंह को टटोलने लगी 

नीरज मेरी चूचों को देख कर मस्त हो गया वह उन्हें कभी कास के दबता कभी चूसता और कभी निप्पल को काट लेता मुझे इस सब मैं बड़ा मजा आ रहा था और मैं उस के मुंह और गर्दन पर चुम्बन पर चुम्बन दे रही थी और अपनी टाँगें फैला कर उस को आगे बढ़ने के लिए निमंत्रण दे रही थी 

फिर नीरज ने अपने हाथ मेरी पेंटी मैं घुसा दिया और चूत को अपनी हथेली मैं भर लिया 


उफ्फ्फ कितना मजा आ रहा था ,,,उस मर्द को अपना शरीर समर्पण कर देने का मन  कर रहा था 

मैं ने भी उस का लंड दबाना स्टार्ट कर दिया अब नीरज के मुंह से सस स्स्स्स स्स्स निकल रहा था 

"ओह्ह्ह सेक्सी"   नीरज ने तारीफ़ मैं पहले दो शब्द कहे 

"ओह डॉर्लिंग " मेरे मुंह से निकला 

"ओह रानो" यह मेरा नया नाम था 

"ओह राजा" कह कर मैं ने भी उस को अपना मान लिया 

जैसे ही हम पूरे नंगे हुए नीरज नीचे झुका और मेरी चूत के होंठों पर एक चुम्मा दे डाला 

"बड़ी मस्त खुशबू है" नीरज बोला और मैं ने सोचा चूत की  खुशबू भी मस्त हो सकती है क्या ? वहाँ तो पेशाब की बदबू होनी चाहिए मगर बाद मैं मुझे पता चला की अगर चूत को साफ़ रखा जाए तो उस मैं मर्द को मस्त कर देने वाली एक खुशबू होती है 

फिर तो नीरज एक मंझे हुए खिलाड़ी की तरह मेरी टांगों को फैला कर मेरी चूत  को चाटने लगा 

यह मेरे लिए ज्यादा हो गया और मेरे शरीर मैं भूचाल आ गया बाद मैं जब मैं सेक्स के बारे मैं सब जान गयी थी तब मुझे पता चला की मैं इतने मैं ही झड़ गयी थी 

मगर नीरज रुका नहीं और मेरी चूत  को प्यार मिलता रहा चूत  रस  बहाती रही और नीरज उस को पूरा चाट जा रहा था 


"हे भगवान अब कोई गड़बड़ न हो  आज मुझे औरत बन जाने दे" मैं ने मन ही मन इश्वर से प्रार्थना की 
शायद भगवान ने मेरी प्रार्थना सुन कर नीरज को उतावला कर ही दिया उस ने मेरी टांगें उठाई और मेरी चूत  के छेद  पर अपने लंड  को सटा दिया फिर मैं ने आँखें बंद कर ली 

अगले ही क्षण मेरी चूत  मैं ऐसा महसून हुआ जैसे किसी ने उस मैं चाकू घुसा दिया हो मुझे पता था पहली बार ऐसा होता है इस लिए मैं ने अपने होंठ बींच लिए 

"रानो पहली बार है क्या" नीरज ने पूछा 

मैं ने सर हाँ के लिए हिला दिया 

"ओह" 

फिर नीरज ने इतने आहिस्ता आहिस्ता अपने लण्ड  को आगे सरकाया की मुझे पता ही नहीं चला कब वह पूरा का पूरा मेरे अंदर था 

थोड़ी देर ऐसे ही रुक कर नीरज ने अपना मूसल वापिस खींचा और फिर धीरे से अंदर कुछ देर धीरे करने के बाद नीरज की चुदाई  बढे और मुझे भी मजा आने लगा अब मैं चुदाई मैं पूरा साथ दे रही थी 

उम्म्म आअह ओह डॉर्लिंग 

ओह्ह राजा मजा आ गया रे 

नीरज मेरी चूत  को पेले जा रहा था और मैं मस्ती से चुद रही थी 

उह्ह आअह के साथ अब फच फच की आवाजें भी कमरे मैं थी जिस से चुदाई का माहौल और मस्त हो गया था 

मेरे शरीर मैं फिर से हलचल होने लगी मैं दूसरी बार झड़ने की तरफ जा रही थी उधर नीरज भी जोश मैं था और उस  चूतड़ पकड़ कर थिोड़ा और उठाये और उन्द को अंदर तक घुसा कर पेला इस से मेरे झड़ने की शुरुआत हो गयी नीरज भी माल छोड़ने लगा और उस के माल ने मेरी चूत को भर दिया 

फिर हम निढाल हो कर एक दुसरे से चिपका गए हमारी साँसे अभी भी तेज थी 

इस तरह मेरी पहली चुदाई की तमन्ना पूरी हुयी नीरज ने मुझे बताया की कुंवारी चूत छोड़ने का उस का भी पहला अनुभव था 

उस रात हम ने एक बार और चुदाई की 

सुबह जब मैं उठने लगी तब फिर नीरज ने मुझे बिस्तर पर दबा लिया मगर मेरी चूत  दुःख रही थी लस लिए मैं मैं  कहा "जानू अभी मुझे आदत नहीं है ना" थोड़े दिन मैं जितनी बार कहोगे उतना। ... 
नीरज ने आँखें बंद कर के मुझे छोड़ दिया और मैं उस के नीचे से खून के दाग लगी चादर निकाल कर अपने कमरे मैं आ गयी 

कुछ दिन बाद ही गर्भ से बचने के लिए मैं ने कॉपर टी लगवा ली 
उस दिन के बाद हमारी अगले चार साल बेइंतहा सेक्स चली 

हम लोग मेरी माहवारी के दिनों भी सेक्स करने से नहीं रुक पाते थे इस लिए हम  ने गांड मारना स्टार्ट किया 

हम दोनों की चुदाई का थोड़ा अंदाज़ दीदी को भी हो गया था मगर वह चुप रही क्यों की उस को पता था मैं कितनी बड़ी चुद्दल हूँ और अगर नीरज मुझे चोद  कर ठंडा नहीं रखेगा तो मैं जरूर ही बाहर  जा कर चुदूँगी इस लिए उस ने हम दोनों को कभी कुछ नहीं कहा 

मेरी शादी से एक महीने पहले मैं ने कॉपर टी निकलवा दिया और नीरज के बच्चे को अपने पेट मैं आने दिया 

शादी मैं तो यह हालत थी की फेरे पर बैठने से पहले नीरज ने मुझे घाघरा उठा कर चोदा जब मैं फेरे ले रही थी तो मैं  पैंटी नहीं पहनी हुयी थी और  नीरज का वीर्य मेरी चूत  से निकल निकल कर मेरी टांगों पर बह   कर आ रहा था क्यों की उस से थोड़ी देर पहले ही हम दोनों ने ताबड़ तोड़ सेक्स किया था 

शादी के बाद  विदा हो कर मैं अपने पति के साथ ट्रैन से उन के शहर जा रही थी।  नीरज ने उसी ट्रैन की उसी डिब्बे मैं अपनी रिजर्वेशन करवा ली थी फिर हम ने ट्रैन के बाथरूम मैं एक जबरदस्त सेक्स किया 

Saturday, December 7, 2013

ससुर जी के साथ हनीमून

Imageमेरी पिछली कहानियां पढ़ कर आप को पता चल ही गया होगा कि मैं अपने ससुर के साथ पत्नी की तरह रहने लगी थी हम लोग एक ही बेड  पर सोते और दिन रात जब मन करता चुदाई करते ससुर जी की मेरे शरीर के साथ छेड़खानी तो सारा दिन ही चलती रहती थी

एक दिन चुदाई करते करते मैं ने ससुर जी से पूछा "आप हनीमून के लिए कहाँ गए थे ?

अरे हनी मून कहाँ, हमारे मम्मी पापा के घर मैं यह सब नहीं होता था , हमें तो घर मैं ही समय निकाल कर जल्दी से सेक्स करनी पड़ती थी उस मैं तो बस अपना पजामा नीचे सरकाओ साड़ी उठा कर घुसा दो और झटके दे दे कर चोद लो, अब जैसे पूरे नन्गे  हो कर सेक्स करते हैं तो मजा ही कुछ और आता है "


यह सुन कर मैं हंस पडी और बोली "वाह जी वाह बड़ा अजीब  ज़माना था , अपनी बीवी को चोदने  के लिए भी मौका निकालना पड़ता था " मैं ने कहा "चलिए अब इस नए ज़माने की बीवी के साथ हनीमून मना लीजिये न "

"तू सच कह रही है या मजाक कर रही है ? " ससुर जी ने हैरान हो कर कहा ? "तुम सच मैं चलेगी मेरे साथ हनीमून पर" क्या तू ने भी हनीमून नहीं मनाया ?

नहीं पापा जी मैं राजू के साथ देहरादून मैं तीन दिन रह चुकी हूँ,  आप ही की तरह बड़ा तगड़ा चोदू  था , उन तीन दिनों मैं कुल तरह बार हम ने चुदाई की,  उसी को हनीमून मान लेती हूँ वैसे आप के साथ हनीमून का मजा ही कुछ और रहेगा "अब आप ही तो मेरे पति हो"

फिर हम ने अपने हनीमून की तैयारी कर डाली आस पास के लोगों को बता दिया के मैं अपने मायके जा रही हूँ और ससुर जी ने अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को बोला के जमीन के कानूनी काम के सिलसिले मैं दो तीन दिन के बाहर रहना पड़ेगा

फिर एक दिन ससुर जी नाईट बस पकड़ कर कुल्लू चले गए और अगले दिन सुबह मैं  फ्लाइट से कुल्लू   पहुँच गयी और कुल्लू  एयरपोर्ट पर ससुर जी   मुझे मिल गए वहाँ से हम टैक्सी ले कर हम मनाली के लिए  पड़े

ससुर जी टैक्सी मैं ही मेरी चूचियों से खेल रहे थे।  ड्राइवर यह सब देख कर मुस्कुरा रहा था और मुझे भी  कोई शर्म नहीं थी 

मनाली मैं होटल पहुँच कर ससुर जी ने पहली बार मेरा सूट केस उठाया तो वह हैरान रह गए और बोले "अरे पुष्प यह तो बहुत हल्का है "

अंदर चलिए तो बताती हूँ क्यूँ इतना हल्का है "

कमरे मैं जाते ही मैं ने अपना सूटकेस खोल दिया, उस मैं सिर्फ़ एक सेक्सी सी नाईटी  और दो तीन ब्रा और पेंटी थी और कुछ भी नहीं था

पुष्पा तू अपने कपडे क्यूँ नहीं लायी ?

अरे मेरे प्यारे बलमा ! हनीमून पर कपड़ों का क्या काम ? मैं तो 3 दिन आप के सामने ऐसे ही रहूंगी

ससुर जी यह सुन कर हंस पड़े और मुझे बाहों मैं ले कर चूमने लगे


क्यूँ कि हम दोनों ने रात मैं चुदाई नहीं की थी इस लिए दोनों एक दूसरे को भूखे शेर की तरह चूमने लगे, उस समय हम दोनों के बदन एक दूसरे से ऐसे जुड़े थे कि बीच में से हवा भी नहीं गुजर सकती थी।

ससुर जी मेरी गर्दन पर चूमे जा रहे थे और उन्होंने मेरा टॉप उतारा और मेरी चूचियों को दबाने लगा और उन्हें पीने लगे मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। तब उन्होंने मेरा स्कर्ट नीचे खिसका दिया और मैं ने उस को अपने चूतड़ उचका कर अपने बदन से अलग किया   फिर पैंटी भी ऐसे से चली गयी ! अब मैं उनकी बाहों मैं नंगी लेटी हुई थी... और वह मेरे ऊपर लेट कर मेरे सारे बदन को चूमे जा रहे थे .

मेरे बदन को चूमते चूमते उनका मुँह मेरी बुर पर चला गया और फिर उसने मेरी बुर चूमना-चूसना शुरू कर दिया। मेरे पूरे शरीर में तरंगे दौड़ने लगी .

हम दोनों की सांसें तेज़ हो चुकी थी, मैंने कहा- बाबू जी मेरी फ़ुद्दी मैं अपना भुजंग डाल दो , अब मुझसे और नहीं रुका जा रहा...


उसने इतना ही सुनते ही उन्होंने अपनी पेंट उतार दी और कच्छा नीचे किया अब उनका खड़ा लण्ड मेरे सामने था जिस को मैं कई बार अपनी चूत, गांड और मुंह मैं ले  चुकी थी .. मैंने अपने आप अपनी दोनों टाँगें फैला दी।अपने दोनों हाथों की एक एक उंगली डाल कर चूत के होंठों को खींचा इस का सीधा असर ससुर जी पर पड़ा और वह मेरी टांगों के बीच बिस्तर पर घुटने के बल आ गए जिस से उनका लंड मेरी  रस से लबालब चूत के सामने झूलने लगा ! फिर उन्होंने मेरी जाँघों को उठाया और मेरी टांगों को कन्धों पर रख लिया और अपने काले मोटे लंड का  मेरी पिंकी के छेद पर रख कर एक धक्के से उस को अंदर  घुसा दिया पिंकी  इस हमले के लिए पूरी तरह तैयार थी इस लिए भुजंग सीधा मेरी बच्चेदानी के मुंह तक चला  गया, जैसे ही वह मेरी बच्चेदानी के मुंह पर टकराया एक मीठी सी दर्द हुयी ऐसे दर्द से मेरे अंदर एक इच्छा जागृत हो जाती है के मुझे इस बन्दे के बच्चे की माँ बनना है 

अभी जब मैंने अपने ससुर के साथ हनीमून पर होटल के बेड पर उनके कन्धों पर टाँगे रख कर लंड को अपनी चूत मैं उतरवाया हुआ था मैं ने अपनी इस इच्छा को उन्हें बता ही दिया

"मेरे चोदु राजा आज ऐसे चोद  के हनीमून के बाद मेरी कोख तेरे प्यार से भर जाए "

"ओह मेरी पुष्पा रानी तूने मुझे सब सुख दिए हैं मैं भी तुझे वह सब दूंगा जो तेरे मन मैं है "

"सब कुछ" सुन कर मैं कहने ही वाली थी के अब जब मैं उन की पत्नी बन चुकी हूँ तो मुझे उनकी अलमारी मैं रखे सब गहने एक न एक दिन अपने बदन पर देखने हैं और उनके सारे पैसे घर मकान को अपने कब्ज़े मैं लेना है पर अभी के लिए मैं ने अपने आप को रोक लिया क्यूँ के अगर मेरे ससुर को इस उम्र मैं ऐसी मस्ती मिलती रही तो वह सब माल कहीं और जा ही नहीं सकता

फिर हम दोनों ताल मैं ताल मिला कर चुदाई करने लगे

कमरा फचफच की आवाज़ से गूंजने लगा और होटल का भारी भरकम बेड भी हिलने लगा 

करीब मिनट चुदाई के बाद ससुर जी की साँसे कुछ ज्यादा तेज हो चली थी इस लिए मैं ने उन्हें पलट दिया और उन पर चढ़ कर चुदाई जारी रखी

मैं ऊपर नीचे होने के साथ साथ अपने चूतड़ों को गोल गोल भी घुमा रही थी जिस से उन के लंड की जड़ मेरी चूत के होंठों पर रगड़ खा रही थी इस से मेरी चूत नदी की तरह रस बहाने लगी और मेरी और ससुर जी की जांघें और उस के नीचे बिस्तर पर बेडशीट  गीली हो गयी पर हम दोनों को इस का कोई ध्यान नहीं था और हम घचाघच चोदे ही जा रहे थे

ससुर जी ने आखें बंद कर ली थी और मेरे खींच खींच कर मसल रहे थे मेरे चूतड़ दबा रहे थे मैं ने उनको छाती से दबा रखा था और फच फच फच फच उन के लंड को अपनी चूत मैं अंदर बाहर कर रही थी 

फिर उन्होंने मेरे चूतड़ों को पकड़ कर मुझे ऊपर नीचे करने मैं और जोर लगाने लगे यह एक इशारा था कि उनका माल उनकी गोटियों से निकल मेरी बच्चेदानी की तरफ जाने  ही वाला है  गरम गरम माल का अपनी चूत मैं जाने से जो मजा आता है उस के बारे मैं सोच कर मैं भी झड़ने लगी और उधर ससुर जी के माल की पिचकारियाँ मेरे अंदर जाने लगी

फिर मैं कटे पेड़ की तरह उन के ऊपर गिर पडी और उन्होंने मुझे अपनी बाहों मैं बाँध लिया ! लगभग १ मं बाद मैं नीचे झुकी, उन का माल से सन लंड मेरी चुत से बाहर आ गया मैं अपनी जीभ निकाल कर उस को चाटने लगी और पूरी तरह साफ़ कर दिया अब बस वह मेरे थूक से गीला था और खूब चमक रहा था


थोड़ी देर ऐसे ही लेटने के बाद ससुर जी ने कहा "पुष्पा मेरी जान कुछ खायेगी  पीयेगी भी या यूँ ही चुदाई करती रहेगी ?

मैं ने जवाब दिया "हाँ जानू , तेरा मीठा मीठा माल और पीना है "

ससुर जी हंस पड़े, उन्होंने होटल का मीनू कार्ड उठाया और लंच का आर्डर दे दिया

चल कुछ कपडे पहन ले वैटर खाना ले कर आने ही वाला होगा

नहीं मैं तो जब तक हनीमून  पर हूँ बिना कपड़ों के ही रहना है , यह कह कर मैंने कम्बल ओढ़ लिया

ऐसी चुदक्कड़ बीवी सब को मिले " कह कर ससुर जी ने पायजामा डाला और तभी दरवाजे की घंटी बज उठी

ससुर जी ने दरवाजा खोला और वैटर ने अंदर आ कर टेबल पर खाना लगा दिया, मैं पूरी नंगी  कम्बल ओढ़े लेटी रही

वैटर के जाने के बाद मैं कम्बल से निकली और बाथरूम की तरफ चल दी, मेरे ससुर मेरे पीछे आ गए

मैं बाथरूम मैं सु सु कर रही थी और मेरे ससुर जी मुझे देख रहे थे

थोडा हाथ मुंह धो कर मैं वैसे ही खाने की टेबल पर आ गयी और ससुर जी की गोद मैं जा बैठी

ऐसे ही हम ने खाना खाया और फिर से बिस्तर पर आ गए

अब की बार ससुर जी ने मुझे घोड़ी बना कर अपना लंड मेरी चूत मैं पीछे से घुसा दिया

क्यूँ के ससुर जी पिछले दो घंटे मैं दो बार झड़  चुके थे इस लिए इस बार चुदाई बहुत लम्बी चली


Wednesday, November 27, 2013

ससुर जी ने पत्नी बनाया - 2

पहले दिन ससुर जी से चुदने के बाद मैं धन्य हो गयी और फिर हम लोग रोज़ चुदाई करने लगे क्यूँ के उन का बबेटा  यानी मेरा पति दिन मैं बहारबाहर सोती थी  अब मुझे रात भर भर ससुर जी की चुदाई याद आती रहती थी और मैं तड़पड़ाती रहती थी

एक दिन मैं ससुर जी से इस बारे मैं बात की और उन्हें बताया के मैं रात मैं उन की चुदाई के लिए तड़पड़ाती हूँ अह भी बोले के उन्हें भी रात भर मेरी ही याद आती रहती है

यह सुन कर मैं ने उन से कहा "क्यूँ न मैं रात को भी आप के बेड  रूम मैं ही सोने लगूं  ? 

" कौन रोक सकता है हमें "  
किस की मजाल है जो मुझे तुम्हे अपने साथ सुलाने से रोके ? "ससुर जी तैश मैं आ कर बोले

उसी शाम को ससुर जी ने अपने बेटे को बोल दिया कि आज से पुष्पा मेरे साथ सोयेगी

मेरे पति ने बस "ठीक है बाबू जी " बोला और मुझे लगा वह इस बात से खुश ही था

रात होने से पहले मैं ने नयी दुल्हन जैसा श्रृंगार किया और ससुर जी कमरे को फूलों से सजाया फिर दूध का गिलास ले कर उन के कमरे मैं गयी, ससुर जी ने मेरी मांग मैं सिन्दूर डाला मुझे मंगल सूत्र पहनाया फिर  हम ने एक दुसरे को पति पत्नी मान लिया उस रात हम ने चार बार  सम्भोग किया

अगले दिन मेरे ससुर पहले मुझे कोर्ट ले गए और अपनी सारी सम्पति मेरे नाम कर दी फिर हम एक टैटू बनाने वाले के पास गए और मैं ने अपनी चूत के ऊपर ससुर जी के नाम का टैटू बनवाया

वहाँ से निकल कर हम डॉक्टर के पास गए और डॉक्टर से कह कर मैं ने कॉपर टी डलवा ली जिस से इस मस्त चुदाई के बीच बच्चे वच्चे की बात न आ जाये वैसे मैं ने ससुर जी को कह दिया था कि कुछ टाइम के बाद मैं उन के बच्चे की माँ भी बनूंगी

फिर घर मैं  मेरे कपडे पहनना काफी कम हो गया मैं अक्सर घर में या तो पूरी नंगी या ब्रा पेन्टी  मैं घूमती रहती ससुर जी जब चाहे मेरे मूमे, चूतड़, जाघों पर अपने हाथ और होंठ लगा कर मजे ले लेते लगभग हर रोज़ ही हम लोग साथ साथ नहाते थे हफ्ते मैं एक दो बार मैं रेज़र ले कर कर उन की झांटे साफ़ करती और वह मेरी चूत पर शेविंग क्रीम लगा कर उस को सफा चट करते जब भी ऐसा होता तब वह शेविंग केबाद मेरी चूत पर जीभ लगा कर उस को चाट ने लगते जब तक मैं अपनी चूत का सारा रस उन की मुंह पर नहीं छोड़ देती

इस सब प्यार के बदले ससुर जी ने मुझे कई सेक्सी सेक्सी नाइटी और ब्रा पेंटी के सेट दिलवाये

ससुर जी रोज़ अपनी फरमायश मुझे बता देते और मैं शाम को वैसी ही बन कर उन को प्यार देती जैसे एक दिन उन्होंने कहा "आज तू मेरी गर्ल फ्रेंड "उस दिन मैं ने जीन्स और टाइट टॉप पहना जिस मैं मेरे मोम्मे खूब उभर कर दिख रहे थे और बाल खुले छोड़ दिए मेरा यह नया रूप देख कर ससुर की पूरी तरह मस्त हो गए और उन की मस्ती उन की  चुदाई की तेजी मैं दिखाई दे रही थी उस रात उन्होंने मेरे मोम्मे मसल मसल कर मेरी जान निकाल डाली थी

एक और दिन उन्होंने मुझे बोला "आज तू  मेरी रंडी" उस दिन मैं ने चीप सा मेक उप किया , खूब लिपस्टिक लगा कर उन से रण्डियों जैसी बातिएँ करके उन की वासना को भडकाती रही बिस्तर पर उस रात मैं ने उन के ऊपर आ कर चुदाई की और खूब आवाज़ें निकाल निकाल कर मस्ती बढ़ाती रही


एक दिन बात बात मैं ससुर जी ने कहा के अगर वह मेरी कोरी चूत मिलती जो अच्छा लगता, मैं ने उन्हें कहा कि माना के मैं उन को कोरी चूत  नहीं दे सकती पर मेरी गांड तो कोरी ही है  वह मेरी कोरी गांड ले सकते हैं ससुर जी ने बताया की मेरी सासु मान ने  भी उन को गांड नहीं मारने दी थी और मेरी गांड उन के जीवन की पहली कोरी गांड होगी    
उस रात मैं ने अपनी गांड अपने ससुर को पेश करने की की पूरी तैयारी करी पहले गांड के छेद को अच्छे से साफ़ किया फिर उस के अंदर थोडा मक्खन घुसा कर लगाया

रात को ससुर जी का लुंड बुरी तरह फन फ़ना रहा था और इतना बड़ा और मोटा हो गया था कि मुझे एक बार तो दर ही लगने लगा फिर मैं हिम्म्त करी और उन के सामने अपने उस गुलाबी छेद को खोल दिया जिस मैं अभी तक उंगली को छोड़ कर कुछ भी नहीं गया था

मेरे ससुर जी ने मेरा बहुत ध्यान रखा और बहुत ही धीरे धीरे मेरी गांड का उद्घाटन किया

सब से पहले तो उन्होंने अलमारी से सोने का डायमंड से जड़ा एक कड़ा निकला और उस को अपने लंड पर पहन कर बोले
पुष्पा मेरी जान अब जब मेरे लंड का पानी निकाल कर यह ढीला पड़ेगा तब से यह कड़ा तेरा यह सुनते ही मैं गदगद हो गयी और लगा के जल्दी से उस मोटे भुजंग को अपनी गांड मैं उतार लूं

फिर उन्होंने अपनी जीभ से मेरी गांड के छेद को खूब चाटा जिस से मैं पूरी मस्त हो गयी और गांड का छेद अच्छे से गीला हो गया और थोडा खुल गया


उस के बाद काफी देर तक वह अपने लण्ड के सुपारे को मेरी गांड के छेद पर रगड़ते रहे और दबाव बहुत धीरे बढ़ाते गए यह सब इतना धीरे धीरे और मस्ती के साथ हुआ के मुझे बस उस वक़्त थोड़ी सी दर्द हुयी जब उनके लन्ड के सुपारे ने मेरी गांड के छल्ले को पार किया एक बार थोड़ी सी दर्द हुयी

उस रात हमने कमरे की लाइट जला रखी थी बिस्तर पर कुछ इस तरह थे के मेरी चुदाई का सीन मुझे सामने ड्रेसिंग टेबल के शीशे मैं दिखे और  मैं जब जब उनके मोटे हथियार को अपनी गांड मैं घुसते देखती थी तो बड़ा मजा आता था

धीरे धीरे मेरी मस्ती और गांड का छेद ऐसा हो गया कि ससुर जी घचा घच मेरी गांड को पेल रहे थे और मुझे खूब मजा आ रहा था

उस दिन की पहली गांड मरवाई के बाद तो हम लोग गांड के छेद के पूरे मजे लेने लगे और माहवारी के दिनों मैं तो सारी चुदाई गांड मैं ही होने लगी

Tuesday, November 12, 2013

जग्गू ने अनु को औरत बनाया

पहली बार रमा को चोदने के बाद जग्गू अब उस को लगातार चोदने लगा

माँ को चोदने के लिए वह हर हफ्ते रमा के शहर चला जाता और उन दोनों का सारा समय बेड़ रूम मैं ही बीतता थादो दिन और तीन रात लगातार चुदाई के बाद जब जग्गू वापिस जाता तो मुझे ही रमा का कमरा साफ़ करना पड़ताउस मैं कहीं रमा की पैंटी कहीं ब्रा और ढेर सारे कंडोम बिस्तर के नीचे जग्गू के वीर्य से भरे हुए मिलते। मैं सब कुछ जानते हुए भी इस रिश्ते के बारे मैं कुछ नहीं बोलती थी क्यों की जब से रमा ने जग्गू से चुदाई का सिलसिला चालू किया था तब से वह मुझे भी   के साथ सोने से मना नहीं करती थी इस लिए मैं भी यह सब देख कर चुप रही


रमा और जग्गू की चुदाई से सब से गलत असर पड़ा रमा की बेटी अनु पर

इन्ही दिनों अनु ने एक मुंह बोला भाई बना डाला और वह कभी भी घर मैं आता जाता था और दोनों एक कमरे मैं बैठ कर पढ़ते थेयह बात  जग्गू को पता चल गयी और वह अनु की कुंवारी चूत प्राप्त करने की योजना बनाने लगा

अब आगे की कहानी जग्गू की जुबान से सुनिए :-

एक दिन दोपहर को अनु को मुंह बोला भाई राहुल एक पैकेट हाथ मैं ले कर चुपके से अनु के कमरे मैं घुस गया और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया  यह देख कर मुझे कुछ शक़ हुआ और मैं कमरे के पीछे वाली खिड़की पर जा कर अंदर का नज़ारा देखने लगा

राहुल ने वह पैकेट अनु के हाथ मैं दिया और बोला "ले इस को पहन कर मुझे दिखा"

अनु पैकेट ले कर बाथरूम मैं गयी और थोड़ी देर मैं बहुत ही सेक्सी ब्रा और पेंटी मैं बाहर आयी

"क्या क़यामत लग रही है तू " राहुल बोला और मैं भी यही सोच रहा था

सुहाग रात कब मनाएगी मेरे साथ " राहुल ने पूछा

चल पागल कहीं का वह सब शादी के बाद"

मैं ने ठान लिया इस की सुहाग रात तो मेरे साथ ही होनी है

अभी तो मुझे इस राहुल को रोकना होगा नहीं तो वह ही इस ब्रा और पेंटी मैं खड़ी कुंवारी कन्या को भोग लेगा

मैं ने अपना मोबाइल फ़ोन निकला और अनु के इस पोज़ मैं फ़ोटो खींच लिए और एक छोटा सा विडिओ क्लिप भी बना लिया फिर सामने जा कर दरवाजा खटखटा दिया। उन दोनों ने बहुत एर लगा कर दरवाजा खोला और दोनों ऐसे बैठे हुए थे जैसे खूब पढ़ाई कर रहे हों.

मैं ने जाते ही राहुल को दो तीन तमाचे दिए और उस को भगा दिया फिर अनु के बाल पकड़ कर पूछा "क्यूँ री क्या कर रही थी इस के साथ"

ताऊ जी हम तो पढ़ रहे थे वह रोते हुए बोली
अच्छा यह पढ़ाई करते हो तुम ? मैं ने मोबाइल निकाल कर एक फ़ोटो उस को दिखा दिया

अब वह एक दम चुप थी और रोती जा रही थी
चल आने दे अपनी माँ को मैं बताऊंगा उस को क्या पढ़ाई कर रही है उस की बेटी
नहीं ताऊ जी प्लीज मम्मी को कुछ मत बताना , आप जो कहोगे वह मैं करूंगी
अनु शायद जानती थी के रमा मेरे कहने पर उस के साथ कुछ भी कर सकती थी
अच्छा ऐसी बात है ? तो चल उतार यह कपडे और दिखा मुझे भी वह हुस्न जो अपने यार को दिखा रही थी
ताऊ जी प्लीज ऐसा मत कॆजिये…"प्लीज़"
अच्छा अभी कह रही थी सब कुछ करेगी मेरे कहने पर ...मैं ऐसे प्लीज होने वाला नहीं हूँ

अनु ने रोते हुए अपना कुरता और सलवार उतार दी और ब्रा और पेंटी मैं आ गयी
वाह क्या हुस्न पाया था लड़की ने , बिलकुल माँ पर जा रही थी , रमा की तरह उस के भी भारी भरी स्तन थे और गांड मस्त होती जा रही थी  मैं ने सोचा जब इन पर मर्द का हाथ लगेगा तो और चमक जायेगी
इन को भी उतार

नहीं ताऊ जी , इतना ही ...
अच्छा ठीक हैं मुझे रमा से ही कह कर तेरी फ़ुद्दी के दर्शन करने पड़ेंगे
नहीं प्लीज अच्छा लीजिये आप कहते हैं तो

उस ने ब्रा उतार दी ... उफ़ मेरा लैंड मेरे कछ्छे मैं उछलने लगा

अब मैं आगे बढ़ा और उस की पेंटी नीचे सरका कर उस की प्यारी प्यारी चूत  को पहली बार मर्द की आँखों के सामने किया

उस ने जांघें सिकोड़ कर अपने नंगे पैन को छुपाना चाहा मगर मैं ने उस को दबोच लिया
और अपने कपडे उतारने लगा

जल्दी ही मेरे लौड़ा बहार आ गया और मैं ने अनु को बिस्तर पर पटक डाला और उस के मुंह पर अपने होंठ दबा दिए जिस से उस की आवाज़ ही ना निकले
फिर जबदरदस्ती उस की टाँगे फैला कर उस की चूत  को अपने लंड  के सामने किया और अपने लंड  का सुपाड़ा उस के छेद  मैं घुसा दिया
अनु दर्द से छटपटा रही थी और उस की आँखों से आंसूं निकल रहे थे मगर इस के इलावा उस ने कुछ नहीं  किया

मैं थोड़ी देर ऐसे ही रुका जिस से लड़की थोड़ी ढीली पद जाए और उस के बाद लंड और आधा उस की चुत मैं सरका दिया गरम गरम खून की धार अनु की चूत से बहती हुयी बिस्तर पर जाती महसूस हो रही थी मेरा लंड अपने जीवन की तीसरी कुंवारी और पांचवीं चूत पा का मस्त हो रहा था यह सोच सोच कर मेरा लंड और ज्यादा फूल गया था और अनु की पतली सी चूत मैं कस  के फंसा हुआ था

जब मैं कुछ देर रुका रहा तो अनु भी कुछ शांत हुयी इस के बार मैं ने धीरे धीरे अनु की चूत मैं अपना लंड अंदर बहार करना शुरू किया एक टाइट चूत की गहराई तक लंड घुसाने मैं बड़ा मजा आ रहा था पांच मिनट के बाद मुझे लगा अब अनु रोयेगी नहीं और  मैं ने अपना हाथ उस के मुंह से हटा लिया , लड़की सच मैं रोना बंद कर चुकी थी फिर तो मैं ने अपने झटके तेज कर दिए और पांच मिनट के बाद अनु अपने चूतड़ उचका उचका कर चुदाई करव रही थी  मस्त हो गया और कस के पेलने लगा फिर थोड़ी ही देर मैं अनु ने मुझे जकड लिया और झड़ने लगी अपनी पहली ही चुदाई मैं पूरा संतोष बहुत काम लड़किओं को मिलता है अनु अब औरत बन चुकी थी और चुदाई का असली मजा भी ले चुकी थी।  मुझे पता था अब वह मुझ से खूब चुदेगी। शाम को मैं ने रमा को बता दिया के मैं ने उस की कली को फूल बना दिया है पहले तो वह नाराज़ हुयी मगर जब मैं ने उस को पूरी बात बतायी तो वह बोली ठीक किया बाहर वाले से अच्छा है घर के लोग कच्ची कली का मजा लें

इस के बाद मैं ने अनु को कई बार चोदा और फिर उस की शादी राहुल से करवा दी राहुल के साथ उस की सुहाग रात के दिन मैं और रमा उन के कमरे मैं घुस गए और राहुल के सामने ही उस की दुहन अनु को ननगा कर के चोदा इसी बीच रमा भी नंगी हो चुकी थी और राहुल से चुदवाने लगी इस तरह बेचारे राहुल को अपनी पहली सेक्स अपनी सासू से करनी पडी

अब राहुल की एक्सीडेंट मैं मौत हो चुकी है और मैं अनु को अपने साथ रखता हूँ रोज़ रात चोद्ने के लिए





Thursday, October 31, 2013

ससुर जी ने पत्नी बनाया

दोस्तो यह  है एक ससुर (मेरे ससुर ) की अपनी बहु के साथ सेक्स की कहानी जिस ने अपने निक्कम्मे बेटे की शादी मुझ से इस लिए करवाई के वह अपनी बहु को अपनी पत्नी बना कर रख सके

आज मेरे ससुर ने मुझे वह सब दिया है जो एक पति अपनी अपनी पत्नी को देता है, एक आराम दायक घर, अच्छा पैसा, गहने, कपडे, होटलों मैं खाना पीना और एक मोटे लंड से मस्त मस्त चुदाई

मैं ने भी उनके बिस्तर को गरम करने के इलावा उन के साथ एक नव-विवाहिता की तरह मून मनाया और उन के बीज को अपने पेट मैं पाल कर उन का तीसरा बेटा पैदा किया , हाँ उन को अपनी कोरी चूत नहीं दे सकी क्यूँ के मैं अपनी सील मैं शादी से बहुत पहले ही तुड़वा चुकी थी इस बात का मेरे ससुर को कोई दुःख नहीं क्यों ई वह बहुत रसिया स्वाभाव के हैं और उन के जीवन मैं चूतों की कोई कमी नहीं रही

मेरी जवानी  आते ही मुझे तो चुदाई की इच्छा इतनी होने लगी के मैं आस पास के सब लड़कों से चुदने की सोचने लगी थी सब से पहला नंबर लगा मेरी मौसी के बेटे संजय.  संजय खूब गोरा चिट्टा हमेशा हंसी मजाक मैं लगे  वाला लड़का था, हम दोनों मैं खूब पटती थी

सर्दी की एक रात मैं और संजय चिपक कर सो रहे थे, संजय के लंड मैं तनाव आ चूका था और मैं उस तनाव को अपनी गांड पर महसूस कर रही थी ! मेरा बदन गरम होता जा रहा था और चूत पनिया रही थी संजय ने शुरूआत मेरी चूचयों दबाने से की  और धीरे धीरे हरकतें बढ़ती गयी जल्दी ही उस के हाथ मेरी पेंटी के अंदर जा कर मेरी पर भी चूत पर आ गए  मगर था तो वह भी अनाड़ी  ही पहले तो मेरी ब्रा ही नहीं खोल पा रहा था आखिर मुझे ही अपनी ब्रा के हुक खोल देने पड़े फिर जब मैं पूरी तरह साथ देने के बाद भी अपने लोडे को मेरी चूत  मैं नहीं घुसा पा रहा था तब मैं ने उस को अपने हाथ से पकड़ कर अपने अंदर किया और आखिर मैं मुझे लड़की से औरत तो बना दिया मगर दो तीन झटके दे कर माल गिरा दिया . संजय को उस के बाद भी दो तीन बार कोशिश करने के बाद ही ढंग से चुदाई करना आया और मुझे चुदाई का वह मजा मिल सका जिस की हर औरत को तमन्ना रहती


संजय के साथ मैं चुदाई करती हूँ इस बात का पता हमारे ड्राईवर राजू को चल गया और उस ने मुझे ब्लैकमेल कर के अपने साथ चुदने के लिए मजबूर  किया यह राजू मस्त चोदु निकला  उस का लंड भी खूब मोटा था और जम के चुदाई करता था ! इस लिए अब मुझे संजय के साथ उतना मजा नहीं आता था और मैं ज्यादा से ज्यादा राजू से चुदने की कोशिश मैं रहती थी

ज्यादा चुदाई से मुझे कई नुक्सान झेलने पड़े, मैं पढाई मैं पीछे रहने लगी और एक साल फ़ैल ही हो गयी, फिर एक बार मेरे महीने के दिन चढ़ गए और टेस्ट करवाने से पता चला के मेरे पेट मैं बच्चा है वैसे मुझे पता नहीं था के यह संजय या राजू किस का है क्यूंकि उन दिनों दोनों ही मुझे छोड़ लेते थे मगर मैं ने बड़ी चतुराई से उस का दोष संजय पर डाला और संजय ने पेट गिराने का सारा खर्च किया इस के बाद संजय मुझ से दूर होता गया और मैं पूरी तरह राजू की थी


फिर एक दिन मम्मी और डैडी को भी पता चल गया ! उस के बाद तो डैडी ने जल्दी से जल्दी मेरी शादी करवाने की ठान ली, मगर मेरी बात जहां भी चलती राजू को पता नहीं कैसे पता चल जता और वह बात बिगड़वा देता
इसी बीच मेरे ससुर अपने छोटे बेटे का रिश्ता ले कर हमारे घर आये डैडी तो मेरा रिश्ता जल्दी करना ही चाहते थे इस लिए उन्होंने कुछ भी देखा नहीं के लड़का क्या करता है, इन लोगों के पास खूब ज़मीन जायदाद तो थी ही सो शादी के लिए हाँ हो गयी, (शादी के बाद मुझे पता लगा के राजू ने वहाँ भी मेरे चरित्र की बात पहुंचा दी थी और मेरे ससुर ने उस को अपने मकसद के लिए और अच्छी बात मानते हुए अनदेखा कर दिया था )
खैर मैं शादी हो कर ससुराल आ गयी, सुहाग रात के दिन ही मुझ पर बिजली गिरी , मेरे पति ने बता दिया के उस को तो गांड मरवाने मैं ही मजा आता है

आप लोग समझ सकते हैं के मेरी  जैसी औरत के लिए यह बात क्या मायने रखती है के उस को अब चुदाई ही नसीब नहीं होगी मुझे  से राजू की याद आने  लगी

कुछ दिन मैं मैं ने देखा के मेरे ससुर जी मेरे ऊपर कुछ ख़ास मेहरबान रहते हैं और मेरी हर छोटी बड़ी जरूरत का ध्यान रखते हैं और पूरा करते हैं मैं सोचने लगी कहीं यह मेरे शरीर का आकर्षण तो नहीं ?

फिर एक दिन मैं ने बाथरूम के दोनों दरवाजों को ध्यान से देखा तो पाया कि उस मैं दो तीन जगह छेद हैं और ऐसे छेद  जो किसी ने बनाये हुए हो अगले दिन मैं नहाते समाया उन पर ध्यान दिया और पाया के कोई उन पर आया है, उस समय घर मैं मेरे ससुर और पति को छोड़ कर कोई नहीं था मामला साफ़ था के मेरे ससुर इन छेदों ने मुझे नंगा देखते हैं क्यूँ के मेरे गांडू  पति को तो मुझ मैं कोई आकर्षन था ही नहीं


अगले एक दो दिन मैं मैं ने देखा के ससुर जी न सिर्फ़ मेरे नहाते मैं बल्कि मुझे मूतते हुए, हगते हुए भी देखते हैं. नहा कर जब मैं निकलती थी तो मैं देखती थी के ससुर जी बिस्तर पर उलटे लेते हैं और शायद उस के बाद मूठ मारते थे क्यूँ के उन के बिस्तर पर मुझे गीला निशाँ मिलता था

फिर मेरी माहवारी के दिन आये और ससुर जी मुझे नैपकिन बदलते भी देख लेते थे, फिर तो मैं ने तय कर लिया के अब मुझे इस बूढ़े से चुदना ही है

माहवारी ख़तम हुयी तो मेरी चुदने की इच्छा और बढ़ गयी और मैं उस दिन सर धो कर नहाई थी मैं ने बाथरूम मैं पड़े ससुर जी के राजोर और शेविंग ब्रश और क्रीम उठा कर अपनी चूत  के बाल साफ़ किये, ऐसा करते वक़्त मैं ने अपनी टाँगे फैला कर चूत  के मुंह को दरवाजे के उस छेद  के सामने रखा था जिस मैं से मेरे ससुर अपनी बहु के नंगे शरीर को देख रहे थे,  मैं ने जान बूझ कर अपने शरीर को ऐसे रखा के ससुर जी मुझे ज्यादा से ज्यादा देख सकें,


उस दिन मैं ने बाथरूम से निकल कर ससुर जी के बिस्तर के पास आयी और उन को छड़ते हुए बोला "पिता जी इस को सही जगह गिराया कीजिये"

ससुर जी हैरान थे और "बोले बहु मेरे पास वह जगह अब नहीं रही "

मैं ने तुरंत जवाब दिया "अरे रोज़ उस जगह को बाथरूम मैं देखते हैं और कहते हैं आप के पास वह नहीं है ?

ससुर जी की आँखें फट गयी और मुंह खुला रह गया "क्या बहु क्यूँ सता रही हो "

अरे पिता जी सताई हुयी तो मैं हूँ, रोज़ मुझे नंगी देख कर गरम कर देते हो और खुद हाथ से ठन्डे कर लेते हो पर मैं क्या करून ?

"ओह बहु यह बात है तो चलो ! " ससुर जी के मुंह से निकल गया

मैं ने कहा "जाना कहाँ है पिता जी घर मैं हम दोनों ही तो हैं"


इतना सुनना था कि ससुर जी ने मुझे खींच कर अपने बिस्तर मैं ले लिए और मेरे शरीर से खेलने लगे
पापाजी कस के मेरी चूचियों को मल रहे  थे और अपना हाथ मेरी चूत पर रख दिया। वह कभी उसके अंदर उंगली करने लगे और कभी मेरी चूत के दाने को रगड़ देते थे  लगे। इस सब से मैं इतनी मस्त हो गयी के उन के शारीर को चूमे जा रही थी और मस्ती मैं भरी हुयी अपने नाखून उन की पीठ मैं गढ़ाए जा रही थी


फिर उन्होंने अपना पजामा उतार दिया और अपना फनफनाता हुआ लंड  बाहर किया  उफ़ क्या लंड था उन का उस को देख कर किसी भी औरत की छूट मैं आग लग जाये


"वाह क्या हथियार है पिता जी, मम्मी जी ने तो बहुत मजे लिए होंगे इस से "मैं बोली

"अरे नहीं बहु उस को तो इस से दर्द होता था इस लिए बहुत ज्यादा चुदाई नहीं करती थी , तू बता तुझे कैसा पसंद है और कितना बड़ा तक ले लेगी मजे से ? राजू का कैसा था ?

"ओह्ह ससुर जी मेरे बारे मैं सब पता था तो मुझे शादी कर के क्यूँ लाये ?"

"मुझे जैसी बहु चाहिए थी उस के लिए तो यह अच्छी क्वालिफिकेशन थी कि बहु सेक्स मैं अनुभवी हो और वह तुम थी सच बता न बहु राजू का कैसा था ? "

पिता जी भगवान् की कसम आज तक ऐसा मस्त लोडा नहीं देखा ,

और कितने लंड देखे हैं तू ने ?

"पिता जी यह चौथा है मगर अंदर जाने वाला यह तीसरा होगा"

"अरे ऐसा कौन था जो मेरी रानी को लंड दिखा कर चोदा नहीं "

"पिता जी वह तो आप के सपुत्र और मेरे पति हैं न ?"

"आह वह निकम्मा, गांडू कहीं का , चलो उस को छोडो और अब मेरी हो जाओ
"हाँ पिता जी अब तो मैं इस लंड के मालिक की हूँ , इस को तो हमेशा अपना बना कर रखूँगी मैं तो"

मगर अपने पहले मिलन की याद मैं कोई निशानी तो दीजिये जिस से यह दिन याद गार बन जाए
"ओह हाँ बहु अभी लो" ससुर जी यह कह कर नंगे ही उठे और अपनी अलमारी खोल कर उस मैं से एक भारी सी सोने की तगड़ी निकाल लाये मैं बिस्तर पर नंगी ही लेती थी, उन्होंने मेरी कमर को उठा कर वह तगड़ी मेरी कमर के चारों तरफ लपेट दी

उन की इस हरकत से मैं निहाल हो गयी और समझ गयी के इस बूढ़े के साथ मुझे जीवन का हर सुख मिल सकता है और मैं ने टाँगे फैला दी, जिस से मेरी सफा चट चूत अपने गुलाबी होंठों से रस गिरती हुयी ससुर जी के सामने आ गयी
ससुर जी ने ज़रा भी देरी नहीं की और कूद कर अपनी जीभ पूरी बहार निकाली और लगे चाटने

बस मैं तो सातवें आसमान पर पहुँच गई, अब तो मूसल चंद से रगड़ाई के झटकों का इंतज़ार था। मेरी तेज तेज चुसाई से पापाजी के लण्ड महाराज का अत्यंत स्वादिष्ट प्रथम रस (प्री-कम) मेरे मुहँ में आना शुरू हो गया था, यह महसूस कर के पापाजी बोले- कैसा लग रहा इसका स्वाद?

मैं बोली- बहुत स्वादिष्ट है, कुछ मीठा और कुछ नमकीन।

वह बोले- क्या मेरा सारा रस तुम मुफ़्त में पी जाओगी और एवज मुझे कुछ नहीं दोगी? उठो और बेड के ऊपर आकर लेटो ताकि मैं भी तुम्हरी महारानी का रस पी सकूँ।

"अच्छा पापाजी !" मैंने कहा और झट से बेड पर आ कर लेट गई।

फिर तो पापाजी 69 की अवस्था में लेट कर मेरी टाँगे चौड़ी कर के मेरी चूत रानी को चूसने लगे और मैं उनके लण्ड राजा को। पापाजी कभी चूत में अपनी जीभ डालते तो कभी उसके अन्दरूनी होंठ चूसते लेकिन जब वह छोले पर जीभ चलाते तो मेरी चूत के अंदर अजीब सी गुदगदी होती और मुझे लगता कि मैं स्वर्ग में पहुँच गई हूँ।

हम दोनों की इस चुसाई से उत्तेजित होकर हमारे दोनों के मुहँ से उंहह्ह.... उंहह्ह्ह्... और आह.. आह्ह्ह... की आवाजें निकलने लगी थीं।

मेरा तो यह हाल था कि मेरी चूत का पानी भी निकलने लगा था, जिसे पापाजी बड़े मजे से पी रहे थे और डकार भी नहीं ले रहे थे।

अचानक पापाजी ने मेरे छोले पर कस कर जीभ फ़ेरी और मेरी चूत एकदम से सिकुड़ी और का रस फव्वारा पापाजी के मुँह पर छोड़ दिया।

उनका हालत देखने का थी, उनका पूरा चेहरा मेरी चूत रानी की इस शरारत से भीग गया था। वह एकदम उठ खड़े हुए और कहने लगे- लगता है इस शरारती रानी को कुछ तो सबक सिखाना ही पड़ेगा, कोई सजा देनी पड़ेगी।

मैं इससे पहले उनका महाराज मुँह से निकालती, उन्होंने एक छोटी सी पिचकारी मेरे मुहँ में छोड़ दी। मैं इसके लिए तैयार नहीं थी इसलिए कुछ रस तो मेरे गले से नीचे उतर गया लेकिन बाकी का सारा रस मेरे पूरे चेहरे तथा मेरी गर्दन पर फ़ैल गया। फिर वह अलग हट गये।

मैंने उठ कर अपने आप को और पापाजी को पौंछा और पापाजी की ओर आँखें फाड़ कर देखने लगी।

पापाजी हँसते हुए बोले- मिल गई न तुझे शरारत की सजा। चिंता मत कर, अभी तो इससे भी बड़ी सजा इस रानी को देनी है।

मैंने अनजान बनते हुए पूछा- पापाजी और कैसी बड़ी सजा देंगे?

तो उन्होंने अपनी बलिष्ठ बाजुओं से उठा कर मुझे मेरे कमरे में ले जाकर बेड पर पटक दिया और मेरे चूतड़ों के नीचे एक तकिया रख दिया। तब मैंने देखा कि रस छूटने के बाद भी पापाजी का लण्ड महाराज अभी भी लोहे की छड़ की तरह अकड़ा हुआ है और वह अगली चढ़ाई के लिए तैयार है। उन्होंने मेरी टांगे चौड़ी करके चूत महारानी को देखने लगे और बोले- यह तो बहुत नाज़ुक सी लग रही है। क्या यह इस महाराज को झेल पायेगी?

मैं तुरंत बोल पड़ी- पापाजी आप कोशिश तो करिये। आगे जो होगा, देखा जाएगा"।

तब वह मेरी टांगों के बीच में आकर बैठ गए और अपने महाराज को मेरी महारानी के छोले पर रगड़ने लगे।

इससे मेरी हालत बहुत खराब होने लगी, मैंने कहा- पापाजी, अब और मत चिढ़ाओ और इसे जो सजा देनी है वह जल्दी से दे दीजिए।

तब पापाजी बोले- चिंता मत कर ज़रा सजा के लिए इसे तैयार तो कर लूँ !

इसके बाद उन्होंने अपना लण्ड महाराज, जो इस समय अपने पूरे उफान पर था और पूरे आकार का हो चुका था, मेरी चूत के मुँह के पास रख दिया और हलके से धक्के मार कर उसे चूत के अंदर घुसेड़ने लगे। मेरी चूत तो उस समय लण्ड की इतनी भूखी थी कि उसका मुँह अपनेआप खुलने लगा और देखते ही देखते उसने पापाजी के महाराज के सुपारे को निगलना शुरू कर दिया। पापाजी महारानी की यह हिमाकत देख कर बहुत हैरान हुए और जोश में आ कर एक जोर का धक्का दे मारा।

फिर क्या था महरानी की तो चूं बोल गई और मेरे मुहँ से एक जोर की चीख आईईईईए... निकल गई।

पापाजी एकदम मेरे ऊपर झुक गए और मेरे समान्य होने तक वैसे ही रुके रहे। वह मेरी चूचियों को दबाते रहे तथा मुझे जोर से चूमते रहे।

जब मैं कुछ ठीक हुई तब मैंने उनसे पूछा- कितना गया?

तो वे बोले- अभी तो आधी सजा मिली है। बाकी आधी सजा के लिए तैयार हो तो बताओ।

जब मैंने हामी भर दी तब उन्होंने कस कर एक और धक्का मारा और अपना पूरा महाराज मेरी महारानी के बाग में पहुँचा दिया।

मैं एक बार दर्द के मारे फिर "आईईईईए... आईईईईए.... कर के चिल्ला उठी। मुझे लगा कि मेरी चूत फट गई है और इसीलिए इतना दर्द हो रहा है।

मेरी चूत की सील टूटने पर भी इतनी दर्द नहीं हुई थी जितनी कि अब हो रही थी। पापाजी मेरी तकलीफ को समझते हुए रुक गए थे और अपना दाहिना हाथ मेरी चूत के ऊपर रखा और थोड़ा दबाया और मेरे ऊपर लेट गए। बाएं हाथ से मेरी चूची को मसलते हुए पूछा- अब कैसा लग रहा है? अगर तुम कहती हो तो मैं निकाल लेता हूँ नहीं तो जब कहोगी तभी आगे सजा दूंगा।

और इसके बाद अपने होंटों को मेरे होंटों पर रख कर उन्हें चूसने एवं चूसाने लगे।

हम करीब पांच मिनट ऐसे ही पड़े रहे और मैं अपनी किस्मत को इतना लंबा मोटा और सख्त लण्ड से चुदाई के लिए सहराने लगी। मेरी चुदने की तमन्ना कितनी अच्छी तरह पूरी हो रही है इससे मैं बहुत खुश थी।

जब मुझे लगा कि मैं आगे के झटके सह लूंगी तब मैंने पापाजी से कहा- मैं आपकी देने वाली बाकी कि सजा अब काटने को तैयार हूँ। चलिए शुरू हो जाइये।

मेरा इतना कहना था कि पापाजी ने अपनी गाड़ी स्टार्ट करी और धक्के लगाने लगे। पहले फर्स्ट गियर लगाया, फिर सेकंड गियर और इसके बाद थर्ड गियर में चलने लगे और मुझसे पूछने लगे- क्यों कोई तकलीफ तो नहीं हो रही?

मैंने कहा- नहीं, मुझे तो अभी मज़े आने शुरू ही हुए है। आप अभी इसी स्पीड से मेरी चुदाई करते रहें। जब स्पीड बढ़ानी होगी मैं बता दूँगी।

अगले दस मिनट हम दोनों इसी तरह चुदाई करते रहे और जब मैंने महसूस किया कि स्पीड बढ़ाने का समय आ गया है, तब मैंने भी अपने जिस्म को पापाजी की स्पीड के हिसाब से हिलाना शुरू कर दिया और बोली- पापाजी, अब अपनी गाड़ी को चौथे गियर में डालिए।

फिर क्या था पापाजी ने थोड़ी स्पीड और बढ़ा दी और हमारी चुदाई के आनन्द को चार गुना कर दिया। मैं अब उछल उछल कर चुद रही थी और पापाजी झटके पर झटके मार कर चुदाई करे जा रहे थे।

हम दोनों के मुँह से उंहह्ह्ह.... उंहह्ह्ह... और आहह्ह्ह... आह्हह्ह्ह... की तेज तेज आवाजें निकलने लगी थीं। इस डर से कि आवाजें बाहर न सुनाई दे हम दोनों ने अपने होंट अपने दातों के नीचे दबा रखे थे।

अब मेरी चूत में खलबली मचने लगी थी और वह भिंच कर पापाजी के लण्ड को जकड़ने लगी थी। इतने में चूत के अंदर खिंचाव होना शुरू हो गया और उसकी चूत में से पानी भी रिसना शुरू हो गया। मैं दो बार तो छुट भी गई थी और अब तीसरा खिंचाव आने वाला था।

अब मुझसे और नहीं सहा जा रहा था इसलिए मैंने पापाजी से कहा- अब जल्दी से टॉप गियर लगा दीजिए।

मेरे कहने पर उन्होंने फुल स्पीड कर दी और मेरी चूत में वह इस जिंदगी के सबसे तेज झटके लगाने लगे। उनका लण्ड महाराज मेरे चूत की गहराइयों को पार कर मेरी बच्चेदानी के अंदर घुस गया था।

अब मेरे से नहीं रहा गया, मैं चिल्ला उठी- पापाजी, और तेज, और तेज, आह.. आह.. मैं गईईईए.. गईईईए.. गईईईए.. गईईई..।

मेरा जिस्म अकड़ गया और चूत लण्ड से चिपक गई। इसी समय पापाजी की भी हुंकार सुनाई पड़ी और उनका लण्ड मेरी चूत में फड़फड़ाया। एक ज़बरदस्त पिचकारी छूटी और मैं तो उस समय के आनन्द में पापाजी के रस की नदी में बह गई। इसके बाद पापाजी मेरे ही ऊपर लेट गए और हम दोनों को मालूम ही नहीं रहा के हम इस तरह कितनी देर ऐसे ही पड़े रहे।

फिर हम उठे और अपने आप को एक दूसरे से अलग किया और हम दोनों के रसों का चूत-शेक निकल के मेरी जांघों से नीचे की ओर बहने लगा।

मैं बाथरूम की ओर भागी और पापाजी मेरे पीछे वहीं आ गए। मेरी जांघों पर बहते हुए चूत-शेक को देख कर मुस्करा रहे थे। तभी मेरी नज़र पापाजी के लण्ड पर पड़ी और मैंने देखा की उनका लण्ड बाथरूम की रोशनी में ऐसे चमक रहा था जैसे उस पर चांदी का वर्क चढ़ा दिया था।

असल में चूत से निकालने पर उसके ऊपर चूतशेक का लेप हो गया था और वह चमक रहा था। मेरे से रहा नहीं गया और मैंने उस अपने मुँह में लिया और चूसने लगी।

मैंने जब लण्ड को चाट के साफ कर दिया तो पापाजी ने पूछा- स्वाद कैसा है?

मैंने जवाब दिया- मलाई जैसा है।

तब पापाजी ने अपनी दो उंगलियों मेरी चूत में डाल कर बाहर निकालीं और उसमें लगे चूतशेक को चाटने लगे, फिर बोले- हाँ, तुम ठीक कह रही हो, यह तो मलाई ही है, मेरी और तुम्हारी। आज तो यह बह गई पर अगली बार इसे इकठा करके खाएँगे।

फिर हम दोनों एक दूसरे को धोने और साफ़ करने लगे।

जब दोनों तरफ की थैलियाँ खाली कर दी तब ही वह अलग हुए और अपने खड़े लण्ड को पकड़ कर मुझे दिखाने लगे।

मैंने कहा- हाँ, मैं जानती हूँ कि आपके महाराज को आराम के लिए गद्देदार और गर्म जगह चाहिए, इसका इंतजाम मैं अभी कर देती हूँ। अब इसके साथ साथ हमें भी आराम करना चाहिए, नहीं तो आपकी कमर का दर्द आपको परेशान कर देगा।

अब यह मज़े तो हम आगे जिंदगी भर लेते रहेंगें।

इसके बाद मैं उठ के पापाजी के ऊपर आ गई और उनके खड़े लण्ड पर जाकर बैठ गई और उनका लण्ड मेरी चूत की गहराइयों की नर्म और मुलायम जगह आराम करने पहुँच गया था।

इस के बाद मैं ने अपने चूतड़ों को ऊपर नीचे करना शुरू किया जिस से ससुर जी का लंड मेरी चूत मैं अंदर बाहर होने होने लगा इस से हम दोनों मस्त हो गए ससुर जी ने तो आकन्हें बंद कर ली और मेरी कमर को कास के पकड़ कर मुझे ऊपर नीचे होने मैं मदद करने लगे

मैं बीच बीच मैं अपने चूतड़ों को गोल गोल घुमा देती जिस से ससुर जी के लंड की  जड़ तक मेरी छूट के होंठों पर  रगड़ खाती थी

ऐसा करने से हम दोनों के मुंह से उह्ह्ह आह्ह्ह सस्स निकल रहा था

जोर से धक्के लगाने के लिए मैंने ससुर जी की बालों से ढकी छाती पर अपने हाथ रखे और पूरा ऊपर नीचे करने लगी

जल्दी ही हम दोनों सेक्स की अंतिम सीमा तक आ गया और चुदाई के धक्के तेज होने लगे
हम दोनों एक ताल मिला कर धक्के लगा रहे थे

फिर मेरे शारीर मैं भूकम्प सा आया और और मैं तरह तरह की आवाजें निकालती हुयी झड़ने लगी
उस के थोड़ी देर बाद ही ससुर जी ने  मेरे चूतड़ कस कर दबाये और अपने माल की पिचकारियाँ मेरी चूत के अंदर छोड़ने लगे, मुझे बस ऐसा लग रहा था के किसीने मेरी बच्चेदानी को गरम पानी से भर दिया है, सच कहती हूँ  उन का इतना सारा माल मेरी चूत की गहराईओं मैं समां गया था के अगर के अगर महीने के शुरू के दिन न होते तो मैं जरूर गर्भवती हो ही जाती